
बिलासपुर/रतनपुर, छत्तीसगढ़ – कानून की रक्षा करने वाले पुलिसकर्मी ही जब कानून का उल्लंघन करने लगें तो स्थिति कितनी शर्मनाक हो सकती है, इसका ताजा उदाहरण बिलासपुर जिले के रतनपुर थाने में सामने आया है। दो पुलिस आरक्षकों पर शराब की तस्करी करने का आरोप है, जिससे न केवल पुलिस विभाग की छवि धूमिल हुई है, बल्कि यह घटना कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी उठाती है।
घटना का विवरण
हाल ही में, रतनपुर थाना के दो आरक्षक – संजय खांडे और सुदर्शन मरकाम – ने कुआंजती गांव में एक कोचिया से 50 लीटर महुआ शराब जब्त की थी। लेकिन, इसके बाद दोनों आरक्षकों ने शराब को जब्त करने के बजाय उसे अपने पास रखा और उसे पोड़ी गांव में बेचने के लिए ले गए। जब ग्रामीणों को इस बात का पता चला, तो उन्होंने दोनों आरक्षकों को घेर लिया और बंधक बना लिया।
आरक्षकों का बंधक बनना और थाने में मदद की मांग
ग्रामीणों द्वारा दोनों आरक्षकों को बंधक बनाने के बाद, दोनों ने अपनी स्थिति से बचने के लिए मामले को सुलझाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों ने उनकी एक न सुनी। जब ग्रामीणों की संख्या बढ़ी और स्थिति तनावपूर्ण हो गई, तो आरक्षकों ने रतनपुर थाने को फोन कर मदद मांगी। तत्पश्चात, पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंची और दोनों को ग्रामीणों से छुड़ाकर थाने ले आई।
जांच और निलंबन
पुलिस विभाग द्वारा मामले की जांच की गई, जिसमें यह सामने आया कि आरक्षकों ने कोचिया से शराब जब्त करने के बाद उसे बिना किसी प्रपत्र के छोड़ा और इसके बदले रुपये लेकर 50 लीटर शराब अपने पास रख ली। फिर, दोनों ने शराब को पोड़ी गांव में बेचने की कोशिश की।
इस कृत्य को अनुशासनहीनता और संदिग्ध आचरण के रूप में देखा गया। परिणामस्वरूप, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने दोनों आरक्षकों – संजय खांडे और सुदर्शन मरकाम – को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। एसएसपी ने आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा कि यह कृत्य पुलिस की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के विश्वास के खिलाफ है।
पुलिस की किरकिरी
इस घटना ने न केवल पुलिस विभाग की छवि को धूमिल किया, बल्कि यह भी दर्शाया कि कुछ पुलिसकर्मी अपने पद और कर्तव्यों का गलत फायदा उठाने में लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस विभाग को अपने अधिकारियों के कार्यों पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए ताकि ऐसे कृत्यों से बचा जा सके।
निलंबित आरक्षक
1. आरक्षक 1265 – संजय खांडे
2. आरक्षक 1163 – सुदर्शन मरकाम