छत्तीसगढ़

MCB में ‘चंगाई सभा’ के नाम पर धर्मांतरण के आरोप…! बुलडोजर कार्रवाई के बाद राजनीतिक टकराव तेज

वनभूमि कब्जा और ‘फर्जी पट्टा’ का विवाद

एमसीबी, 09 दिसंबर। MCB : जिले में कथित ‘चंगाई सभाओं’ के जरिए धर्मांतरण के आरोपों और वनभूमि पर अवैध निर्माणों पर हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद मामला पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। हाल ही में वन विभाग ने जंगल की जमीन पर अवैध कब्जे में बने तीन घरों को तोड़ा था। आरोप है कि ये घर ईसाई धर्म अपना चुके परिवारों के थे और जंगल के अंदर से ही स्थानीय लोगों को धर्मांतरण के लिए प्रेरित किया जा रहा था।

बुलडोजर कार्रवाई के बाद राजनीतिक गर्माहट

वन विभाग की कार्रवाई के तुरंत बाद कांग्रेस नेताओं के समर्थन से मामला और गर्म हो गया। आरोप है कि प्रभावित परिवारों को स्थानीय मंत्री के गाँव ले जाकर धरना-प्रदर्शन कराया गया। इसके बाद वन विभाग पर दबाव बनाने के लिए वनमंडल कार्यालय का घेराव किया गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व सांसद दीपक बैज भी खुलकर इन परिवारों के समर्थन में सामने आए। पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने भी आदिवासी अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए वन विभाग पर कार्रवाई वापस लेने का दबाव बनाया है।

धर्मांतरण गतिविधियों के आरोप

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, जिन घरों को हटाया गया, वे कथित रूप से धर्मांतरण गतिविधियों का केंद्र बने हुए थे। बताया गया कि ये लोग जंगल के भीतर ‘चंगाई सभा’ आयोजित कर आसपास के ग्रामीणों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करते थे। प्रभावित परिवार बाहर से आकर जंगल में बस गए थे और प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर घर बनाकर रह रहे थे।

वनभूमि कब्जा और ‘फर्जी पट्टा’ का विवाद

कांग्रेस नेताओं की ओर से कथित पट्टा दिखाकर प्रभावित परिवारों का पक्ष रखा गया, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि ये पट्टे फर्जी हैं और किसी प्रकार से वन विभाग की स्वीकृति नहीं रखते। वन विभाग के अधिकारी लगातार यह स्पष्ट कर रहे हैं कि, जंगल की जमीन किसी भी व्यक्ति को आवंटित नहीं की जा सकती, और वनभूमि पर बने इन घरों को कानूनी आधार पर हटाया गया है।

मुद्दे पर बढ़ती राजनीतिक टकराहट

इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। एक ओर स्थानीय लोगों और आदिवासी संगठनों का कहना है कि जंगल की जमीन बचाने और धर्मांतरण रोकने के लिए कार्रवाई जरूरी थी। दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि कार्रवाई भेदभावपूर्ण और जल्दबाज़ी में की गई।

कार्रवाई पूरे प्रदेश में लागू करने की मांग

स्थानीय सामाजिक संगठनों और वन संरक्षण समितियों ने राज्य सरकार से माँग की है कि, पूरे छत्तीसगढ़ में चल रहे ऐसे अवैध कब्जों को चिह्नित कर सख्त कार्रवाई की जाए, विशेषकर उन स्थानों पर, जहाँ धार्मिक गतिविधियों की आड़ में धर्मांतरण के प्रयास किए जा रहे हैं।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button