
नई दिल्ली। share market timing change शेयर बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए सोमवार 3 अगस्त से कई अहम नियमों में बदलाव लागू हो गए हैं। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) से जुड़े शेयरों में क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था शुरू कर दी है। इसके साथ ही डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रेडिंग का समय भी 10 मिनट बढ़ा दिया गया है। अब F&O बाजार शाम 3:40 बजे तक खुला रहेगा।
सेबी के मुताबिक, इन बदलावों का उद्देश्य बाजार बंद होने के समय शेयरों की क्लोजिंग प्राइस को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है। नई व्यवस्था से बेहतर प्राइस डिस्कवरी को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय शेयर बाजार की ट्रेडिंग प्रणाली वैश्विक मानकों के और करीब आएगी।
F&O शेयरों में नई क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था
F&O के लिए पात्र कैटेगरी-1 शेयरों में सामान्य ट्रेडिंग पहले की तरह दोपहर 3:15 बजे तक जारी रहेगी। इसके बाद 3:15 बजे से 3:20 बजे तक ट्रांजिशन पीरियड होगा। इसके बाद 3:20 बजे से क्लोजिंग ऑक्शन सेशन शुरू होगा।
क्लोजिंग ऑक्शन के पहले चरण में 3:20 बजे से 3:25 बजे तक निवेशक ऑर्डर डाल सकेंगे। इसके बाद 3:25 बजे से 3:30 बजे तक दूसरा चरण चलेगा। इस दौरान नए ऑर्डर दिए जा सकेंगे, लेकिन मार्केट ऑर्डर में बदलाव या उन्हें रद्द करने की अनुमति नहीं होगी।
ऑक्शन के अंतिम दो मिनट में सत्र कभी भी समाप्त हो सकता है। इसके बाद 3:30 बजे से 3:35 बजे तक ऑर्डर मैचिंग की प्रक्रिया पूरी होगी। इसी प्रक्रिया से तय हुई कीमत को उस शेयर की आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस माना जाएगा।
F&O ट्रेडिंग का समय बढ़ा
सेबी ने डेरिवेटिव सेगमेंट की ट्रेडिंग अवधि में भी बदलाव किया है। अब फ्यूचर्स और ऑप्शंस में कारोबार शाम 3:40 बजे तक किया जा सकेगा। इससे पहले F&O बाजार 3:30 बजे बंद हो जाता था।
हालांकि, कैश मार्केट में जिन शेयरों का कारोबार F&O सेगमेंट में नहीं होता, उनके लिए ट्रेडिंग समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे शेयरों में कारोबार पहले की तरह शाम 3:30 बजे तक ही होगा।
प्री-ओपन सेशन के समय में भी बदलाव
सोमवार से प्री-ओपन सेशन की समय व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। अब सुबह 9:00 बजे से 9:07 बजे तक ऑर्डर एंट्री की सुविधा होगी। इसके बाद 9:07 बजे से 9:15 बजे तक ऑर्डर मैचिंग प्रक्रिया चलेगी। नियमित कारोबार पहले की तरह सुबह 9:15 बजे से शुरू होगा।
निवेशकों को मिलेगा फायदा
सेबी का कहना है कि क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था लागू होने से बाजार बंद होने के समय अधिक निष्पक्ष तरीके से क्लोजिंग प्राइस तय होगी। इससे बाजार में लिक्विडिटी बढ़ने, सभी निवेशकों को समान अवसर मिलने और इंडेक्स फंड समेत अन्य पैसिव निवेश योजनाओं की ट्रैकिंग एरर कम होने की उम्मीद है।
नियामक के अनुसार, ये बदलाव भारतीय शेयर बाजार की कार्यप्रणाली को और मजबूत बनाने तथा उसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों की व्यवस्थाओं के अनुरूप लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।






