छत्तीसगढ़

Right To Education : छत्तीसगढ़ RTE में बड़ा बदलाव…अब केवल कक्षा पहली होगी एंट्री पॉइंट…निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम

पूर्व व्यवस्था में खामियां, पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

रायपुर, 21 फरवरी। Right To Education : बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत राज्य शासन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए केवल कक्षा पहली को ही प्रवेश कक्षा (Entry Point) निर्धारित किया है। धारा 12(1)(ग) के अंतर्गत लिए गए इस फैसले का उद्देश्य आरटीई सीटों के प्रकटीकरण में हो रही अनियमितताओं पर रोक लगाना और आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को अधिनियम का पूर्ण लाभ सुनिश्चित करना है।

पूर्व व्यवस्था में खामियां

पहले नर्सरी, केजी-1 और कक्षा पहली – तीनों को प्रवेश कक्षा के रूप में मान्यता दी गई थी। इस व्यवस्था का कुछ निजी विद्यालयों द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा था।

  • कई बड़ी निजी शालाएं नर्सरी को प्रवेश बिंदु घोषित कर उसकी क्षमता कम दर्शाती थीं और उसी आधार पर 25% आरटीई सीटों का प्रकटीकरण करती थीं।
  • वहीं कक्षा पहली में 4-5 सेक्शन संचालित कर सामान्य विद्यार्थियों को अधिक संख्या में प्रवेश दिया जाता था।
  • इससे आरटीई सीटें वास्तविक क्षमता के अनुरूप प्रदर्शित नहीं होती थीं और पात्र बच्चों को लाभ नहीं मिल पाता था।

दूसरी ओर कुछ छोटी निजी शालाएं अपनी वास्तविक क्षमता से अधिक सीटें दिखाकर ज्यादा आरटीई प्रवेश लेती थीं। इन स्कूलों का संचालन मुख्यतः शासन से मिलने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति पर निर्भर रहता था। बार-बार स्कूल बदलने से कमजोर वर्ग के बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती थी।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

अब सत्र 2026-27 से केवल कक्षा पहली को ही एंट्री पॉइंट बनाया गया है। आरटीई सीटों का निर्धारण Unified District Information System for Education (यू-डाइस) पोर्टल पर दर्ज पिछले वर्ष की कक्षा पहली की वास्तविक प्रविष्ट संख्या के आधार पर किया जा रहा है।

इससे, निजी स्कूलों द्वारा दी जाने वाली भ्रामक जानकारी पर अंकुश लगा है। सीट निर्धारण अधिक पारदर्शी हुआ है। स्तरहीन निजी शालाओं के संचालन पर नियंत्रण संभव हुआ है।

आरटीई सीटों में अभूतपूर्व वृद्धि

नए फैसले के बाद सीटों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, वर्ष 2025-26 में कक्षा पहली में 9,375 आरटीई सीटें थीं। वर्ष 2026-27 में यह संख्या बढ़कर 19,489 हो गई है। केजी-2 में अध्ययनरत 35,335 विद्यार्थी आगामी सत्र में कक्षा पहली में प्रवेश करेंगे। इस प्रकार वर्ष 2026-27 में कक्षा पहली में कुल 54,824 बच्चों को प्रवेश मिलेगा, जो पिछले वर्ष की कुल 53,325 सीटों से अधिक है।

विरोध और शासन की प्रतिबद्धता

पारदर्शिता आधारित इस निर्णय से कुछ निजी विद्यालयों में असंतोष देखा जा रहा है, क्योंकि अब सीट प्रकटीकरण में अनियमितताओं की संभावना समाप्त हो गई है।

हालांकि राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है। यह निर्णय शिक्षा के अधिकार को वास्तविक रूप में लागू करने और समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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