कोरबा, 21 मई। Poison Infused in Hasdeo : बिजली उत्पादन के नाम पर पर्यावरण और जनजीवन से खिलवाड़ का एक और बड़ा मामला सामने आया है। HTPS (हसदेव ताप विद्युत गृह) संयंत्र के झाबू-नवागांव स्थित राखड़ डैम (Ash Dyke) के 19 अप्रैल को फूटने से लाखों टन राख हसदेव दर्री बैराज तक पहुंच गई। हालात इतने गंभीर हो गए कि बैराज को सुरक्षित रखने और प्रदूषित पानी को हटाने के लिए पांच दिनों तक लगातार गेट खोलकर 4.52 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी नदी में बहाना पड़ा। सिंचाई विभाग ने पानी की बर्बादी और प्रदूषण की गणना करने के बाद बिजली उत्पादन कंपनी पर ₹20.34 करोड़ का भारी जुर्माना लगाया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि मार्च महीने में भी राखड़ डैम फूटने की घटना के बाद कंपनी पर करीब ₹18 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था। डेढ़ महीने के भीतर दूसरी बार हुई इस बड़ी लापरवाही ने HTPS प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राख के सैलाब में डूबा बैराज, किसानों ने जताई आपत्ति
19 अप्रैल को डैम टूटने के बाद राख मिश्रित पानी तेजी से हसदेव दर्री बैराज तक पहुंच गया। इसे खाली करने के लिए 20 अप्रैल से बैराज के गेट खोलकर लगातार पानी छोड़ा गया। इसी दौरान नहरों के माध्यम से खेतों में सिंचाई के लिए भी पानी भेजा जा रहा था। प्रदूषित और राखयुक्त पानी फसलों तक पहुंचने से जांजगीर-चांपा जिले के किसानों ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बैराज का पानी अत्यधिक प्रदूषित हो चुका था, जिससे जल संरक्षण और पेयजल आपूर्ति दोनों पर गहरा संकट मंडराने लगा था।
जांच में सामने आई “घोर लापरवाही”
मार्च में हुई पहली घटना के बाद कलेक्टर कुणाल दुदावत ने अपर कलेक्टर ओंकार यादव के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित की थी। इस जांच रिपोर्ट में विद्युत उत्पादन कंपनी की “घोर लापरवाही” उजागर हुई थी। इसके बावजूद सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था में कोई सुधार नहीं किया गया, जिसका खामियाजा इस दूसरी बड़ी दुर्घटना के रूप में भुगतना पड़ा। नगर निगम ने भी बैराज और नदी में बढ़ते प्रदूषण पर गंभीर चिंता जताई है, क्योंकि शहर की अधिकांश पेयजल आपूर्ति इसी स्रोत से होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आगामी मानसून (बारिश के मौसम) से पहले इसे नहीं सुधारा गया, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
67 वार्डों की जलापूर्ति ठप, पानी में 28% तक घुली राख
कोरबा नगर निगम के 67 वार्डों में नहर और सर्वेश्वर एनीकट से पानी लेकर सप्लाई की जाती है। पानी में राख की मात्रा अत्यधिक होने के कारण कोहड़िया वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में शुद्धिकरण (Purification) की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई। जांच में पाया गया कि पानी में लगभग 28 प्रतिशत तक राख घुल चुकी थी, जिसके कारण पानी को साफ करने में सामान्य से कहीं अधिक समय लगा। इसका सीधा असर शहर की सप्लाई पर पड़ा और जो जलापूर्ति सुबह 7 बजे होनी थी, वह दोपहर 11 बजे तक खिसक गई। लगभग पांच दिनों तक शहरवासियों को इस संकट और अनियमित जलापूर्ति से जूझना पड़ा।
210 मेगावाट बिजली उत्पादन ठप
राखड़ डैम फूटने के बाद सुरक्षा के लिहाज से HTPS की यूनिट-3 और यूनिट-4 को बंद करना पड़ा है। इन दोनों यूनिट्स के बंद होने से कुल 210 मेगावाट का बिजली उत्पादन ठप हो गया है। घटना के 23 दिन बीत जाने के बाद भी उत्पादन दोबारा शुरू नहीं हो सका है, जिससे कंपनी को रोजाना करोड़ों रुपए का अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। HTPS संयंत्र (पश्चिम) के मुख्य अभियंता एच.के. सिंह ने बताया, “राखड़ डैम की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन इसे पूरी तरह ठीक होने में अभी कुछ समय और लगेगा।”
अधिकारी निलंबित, लेकिन ठेका कंपनी पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
इस बड़ी चूक के बाद उत्पादन कंपनी ने आनन-फानन में अधीक्षण अभियंता को हटाकर रायपुर से सत्येंद्र कुमार साहू को नई जिम्मेदारी सौंपी है। साथ ही, सहायक अभियंता (सिविल) और कार्यपालन अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस ठेका कंपनी पर डैम के रखरखाव और मजबूती का जिम्मा था, उस पर प्रशासन ने अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की है?
“नियमों के तहत लगाया गया तीन गुना जुर्माना”
हसदेव परियोजना मंडल के मुख्य अभियंता शंकर राव सोनाने ने बताया कि बिजली उत्पादन कंपनी को पानी उपलब्ध कराने के लिए सिंचाई विभाग के साथ पहले से अनुबंध (Agreement) है। सामान्य दिनों में ₹15 प्रति क्यूबिक मीटर की दर से जलकर लिया जाता है, लेकिन इस बार पर्यावरण को पहुंचे नुकसान और पानी की बर्बादी को देखते हुए नियमानुसार तीन गुना जुर्माना लगाया गया है।
सुलगते सवाल
0डेढ़ महीने में दो बार एक ही डैम कैसे फूटा? क्या पहली घटना से कोई सबक नहीं लिया गया?
0पहली जांच रिपोर्ट में लापरवाही उजागर होने के बाद भी सुधारात्मक कदम क्यों नहीं उठाए गए?
0लापरवाह ठेका कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने या उस पर कार्रवाई करने से पैर पीछे क्यों खींचे जा रहे हैं?
0हसदेव नदी, जलीय जीवों और भूजल (Groundwater) पर पड़े इस गंभीर पर्यावरणीय असर की भरपाई कौन करेगा?
0क्या भविष्य में ऐसी आपदाओं को रोकने के लिए कोई स्थायी और ठोस व्यवस्था बनाई जाएगी, या फिर सिर्फ जुर्माने का खेल चलता रहेगा?
कोरबा में लगातार हो रही राखड़ डैम दुर्घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि औद्योगिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के दावे जमीनी स्तर पर पूरी तरह खोखले हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस बार क्या ठोस कार्रवाई करते हैं।