Korba Municipal Corporation: निहारिका दुकान बिक्री की खुलेगी पुरानी फाइल? शेडो के जरिए बिक्री के आरोप, तत्कालीन सहायक राजस्व अधिकारी की भूमिका जांच के घेरे में!

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Korba Municipal Corporation में निहारिका दुकान की बिक्री को लेकर सवाल उठे हैं। शेडो व्यक्ति के जरिए बिक्री के आरोप और तत्कालीन सहायक राजस्व अधिकारी की भूमिका जांच के घेरे में है।

 

कोरबा। Korba Municipal Corporation :नगर पालिक निगम कोरबा की संपत्तियों के आवंटन और बिक्री से जुड़े पुराने मामलों की फाइलें यदि दोबारा खुलीं तो निहारिका क्षेत्र की एक दुकान का मामला भी कई सवालों को जन्म दे सकता है। लंबे समय से बंद पड़ी इस दुकान की बिक्री को लेकर अब शेडो व्यक्ति खड़ा कर प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। पूरे मामले में तत्कालीन सहायक राजस्व अधिकारी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि संबंधित दुकान मूल रूप से एक मुस्लिम व्यक्ति के नाम से दर्ज थी। दुकान लंबे समय तक बंद रही। आरोप है कि इसी दौरान दुकान के वास्तविक स्वामित्व और उपयोग से जुड़े तथ्यों के बीच एक समान नाम वाले व्यक्ति को सामने रखकर बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ऐसा हुआ, तो नगर निगम के रिकॉर्ड में इसकी पुष्टि किस आधार पर हुई और बिक्री की अनुमति किस प्रक्रिया के तहत दी गई?

तत्कालीन सहायक राजस्व अधिकारी की भूमिका पर क्यों उठ रहे सवाल?

इस पूरे मामले में उस समय पदस्थ रहे तत्कालीन सहायक राजस्व अधिकारी की भूमिका को लेकर चर्चा तेज है। आरोप है कि अधिकारी की सक्रियता के बाद दुकान की बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता निगम की मूल फाइल, नोटशीट, आदेश और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। इसलिए अब सवाल यह है कि निगम प्रशासन इस मामले में दस्तावेजी जांच कराएगा या नहीं।

फाइल खुली तो सामने आ सकते हैं अहम दस्तावेज

यदि निहारिका दुकान से संबंधित पुरानी फाइल खोली जाती है तो कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच संभव है।

  • दुकान किसके नाम दर्ज थी?
  • लंबे समय तक बंद रहने के बाद बिक्री की प्रक्रिया कैसे शुरू हुई?
  • बिक्री के लिए आवेदन किसने किया?
  • आवेदक की पहचान और स्वामित्व की जांच किस स्तर पर हुई?
  • क्या समान नाम वाले किसी व्यक्ति को आधार बनाकर प्रक्रिया आगे बढ़ी?
  • संपत्ति का मूल्यांकन किसने किया?
  • बिक्री के लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति ली गई थी या नहीं?
  • पूरी प्रक्रिया में तत्कालीन सहायक राजस्व अधिकारी की क्या भूमिका थी?
  • फाइल की नोटशीट में किस-किस अधिकारी के हस्ताक्षर हैं?

क्या निगम खोलेगा पुराना रिकॉर्ड?

मामला अभी आरोपों और सवालों के स्तर पर है। ऐसे में सबसे अहम भूमिका नगर निगम प्रशासन की होगी। यदि प्रक्रिया पूरी तरह नियमसम्मत थी तो संबंधित दस्तावेज सामने आने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वहीं यदि रिकॉर्ड में कोई विसंगति मिलती है तो जिम्मेदारी तय करने का रास्ता भी खुल सकता है।

निहारिका की दुकान की कथित बिक्री अब सिर्फ एक संपत्ति के हस्तांतरण का मामला नहीं रह गई है। सवाल यह है कि निगम की संपत्ति के मामले में पहचान, पात्रता और बिक्री की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी थी?

अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन इस पुराने मामले की फाइल दोबारा खुलवाकर जांच कराता है या फिर यह मामला भी पुरानी फाइलों के ढेर में दबा रह जाता है।

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