
Korba Breaking: कोरबा के ट्रांसपोर्टिंग गलियारे से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। जाने-माने ट्रांसपोर्टर पशुपतिनाथ का CSEB (Chhattisgarh State Electricity Board) से राखड़ (Fly Ash) का लोड पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं होती! इस बड़े झटके के बाद अब पशुपतिनाथ ट्रांसपोर्टर दोबारा CSEB से राख ट्रांसपोर्ट करने के जुगाड़ में है। अनुमति (Permission) वाले तय स्थान से हटकर, पास में ही कहीं भी अवैध रूप से राख फेंकने के लिए, राख कारोबार से जुड़े लोगों को रिझाने के लिए तरह-तरह के ‘Monsoon Offers’ बांटे जा रहे हैं।
क्या है पूरा ‘चमत्कारी’ मामला और लाइव गाड़ियों का खेल?
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, इस पूरे सिंडिकेट और काले खेल की शुरुआत झाबू राखड़ डैम से होती है। यहाँ से ट्रेलरों में नियम के मुताबिक राखड़ लोड तो किया जाता है, लेकिन उसके बाद शुरू होता है कागजी दस्तावेजों और GPS को ठेंगा दिखाने का खेल!
- ऑन-रिकॉर्ड प्लान: कागजों में दिखाया जाता है कि राखड़ को कोरबा से बिलासपुर के भनसर ले जाया जा रहा है।
- दूरी का गणित: कोरबा से बिलासपुर भनसर जाना, वहाँ गाड़ी खाली करना और वापस आने में कम से कम 5 से 6 घंटे का समय लगना अनिवार्य है।
- चमत्कारी हकीकत: गाड़ियाँ बिलासपुर जाती ही नहीं! ये ठीक डेढ़ घंटे के भीतर पास के ही ‘घनरास गाँव’ में अवैध रूप से पूरी राखड़ को खुलेआम पटक (खाली कर) देती हैं।



