
कोरबा। शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था, अव्यवस्थित बाजार, सड़कों पर अतिक्रमण और आम नागरिकों की रोजमर्रा की परेशानियों के बीच अब नगर निगम ने पावर हाउस रोड पर चार पहिया वाहनों की एंट्री बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है। निगम इसे “स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट” और “विकास” की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, लेकिन प्रभावित व्यापारी इसे सीधे तौर पर अपने व्यापार पर हमला मान रहे हैं।
व्यापारियों का आरोप है कि शहर की मूल समस्याओं से ध्यान हटाकर अब “विकास” के नाम पर ऐसे प्रयोग किए जा रहे हैं, जिनका खामियाजा छोटे और मध्यम व्यापारियों को भुगतना पड़ेगा। उनका कहना है कि “कहीं पे निगाहें, कहीं पर निशाना” वाली स्थिति बन गई है। शहर को व्यवस्थित करने के बजाय अब चुनिंदा बाजारों पर प्रयोग किए जा रहे हैं।
क्या है निगम की योजना?
नगर निगम की योजना के मुताबिक अब पावर हाउस रोड में चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी। ग्राहक और व्यापारी मल्टी लेवल पार्किंग में वाहन खड़े करेंगे और वहां से निःशुल्क ई-रिक्शा के जरिए दुकानों और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स तक पहुंचेंगे।
नगर निगम का तर्क है कि इससे ट्रैफिक जाम कम होगा और बाजार क्षेत्र अधिक व्यवस्थित दिखेगा। चैंबर ऑफ कॉमर्स ने भी इस प्रस्ताव पर सहमति दे दी है।लेकिन सबसे ज्यादा नाराजगी इसी सहमति को लेकर है।
“हमसे पूछा तक नहीं गया”
पावर हाउस रोड के व्यापारियों का कहना है कि जिस फैसले का सीधा असर उनके व्यवसाय पर पड़ने वाला है, उसी निर्णय से पहले उनसे कोई गंभीर चर्चा नहीं की गई।
व्यापारियों का आरोप है कि नगर निगम की बैठक से पहले चैंबर ऑफ कॉमर्स को प्रभावित दुकानदारों के साथ बैठक करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बिना राय लिए सीधे सहमति दे दी गई।
व्यापारियों का कहना है कि बैठक में शहर के दूसरे क्षेत्रों के व्यापारी मौजूद थे, जबकि वास्तविक रूप से प्रभावित होने वाले कारोबारी खुद निर्णय प्रक्रिया से बाहर रहे।
“ऑनलाइन बाजार से पहले ही टूट चुके हैं”
पावर हाउस रोड के दुकानदारों का कहना है कि ऑनलाइन मार्केट और बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के कारण पहले ही व्यापार पर भारी असर पड़ा है। अब यदि ग्राहकों को बाजार तक पहुंचने में अतिरिक्त परेशानी होगी तो इसका सीधा असर बिक्री पर पड़ेगा।
व्यापारियों के मुताबिक ग्राहक सुविधा चाहता है। यदि उसे वाहन दूर खड़ा कर ई-रिक्शा से आना पड़ेगा तो वह बाजार आने से बचेगा। इसका सबसे ज्यादा नुकसान कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर और भारी सामान बेचने वाले व्यापारियों को होगा।दुकानदारों ने यह भी सवाल उठाया कि दुकानों तक माल की सप्लाई और ग्राहकों तक डिलेवरी कैसे होगी?
“पूरा शहर जाम से जूझ रहा, निशाने पर सिर्फ पावर हाउस रोड क्यों?”
व्यापारियों का कहना है कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था केवल पावर हाउस रोड तक सीमित नहीं है। टीपी नगर, घंटाघर, सीएसईबी चौक, पुराना बस स्टैंड, बुधवारी और कई प्रमुख इलाके रोजाना जाम से जूझते हैं।
इसके बावजूद प्रशासन की प्राथमिकता पूरे शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के बजाय सिर्फ एक बाजार क्षेत्र पर केंद्रित दिखाई दे रही है।
व्यापारियों का आरोप है कि प्रशासन और पुलिस विभाग शहर की समग्र ट्रैफिक प्लानिंग पर गंभीरता से काम करने के बजाय आसान विकल्प तलाश रहे हैं।
“पावर हाउस रोड को माल रोड मत बनाइए”
व्यापारियों ने साफ कहा है कि पावर हाउस रोड को उसकी मूल पहचान के साथ रहने दिया जाए। उनका कहना है कि यह कोई पर्यटन स्थल या माल रोड नहीं, बल्कि शहर का सक्रिय व्यापारिक केंद्र है जहां ग्राहक सुविधा सबसे महत्वपूर्ण है।
व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो पावर हाउस रोड पर अनिश्चितकालीन बंद किया जाएगा। अब सवाल यह है कि क्या नगर निगम व्यापारियों की आशंकाओं को दूर कर पाएगा या “विकास” की यह नई परिकल्पना शहर के सबसे पुराने व्यापारिक क्षेत्र में टकराव का कारण बनेगी?



