
कोरबा। दिल्ली पब्लिक स्कूल DPS जमनीपाली के रियूनियन कार्यक्रम में पहुंचे विद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. बी सिंह ने कहा कि समाज और जीवन को बनाने का काम शिक्षा, मीडिया और डॉक्टर करते हैं, लेकिन यदि दिशा गलत हो तो यही क्षेत्र जीवन को बिगाड़ने की वजह भी बन जाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से मीडिया से सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की।
डॉ. सिंह ने कहा कि NTPC की स्थापना के साथ ही कोरबा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की जरूरत महसूस हुई और उसी क्रम में डीपीएस जमनीपाली की शुरुआत हुई। वर्ष 1987 से 1995 तक अविभाजित मध्यप्रदेश में डीपीएस जमनीपाली के प्राचार्य रहे डॉ. सिंह ने कहा कि तब के कोरबा और आज के कोरबा में बड़ा बदलाव आया है। यहां से उन्हें सीखने को बहुत कुछ मिला।
उन्होंने बताया कि कोरबा में कार्यकाल के दौरान डीपीएस में कोचिंग की शुरुआत की गई थी, लेकिन वह प्रयोग सफल नहीं हो सका। बाद में एनटीपीसी के इंजीनियरों और अन्य स्रोतों से शुरू हुई कोचिंग व्यवस्था आज भी निरंतर जारी है। डॉ. सिंह ने कहा कि कोचिंग और बढ़ते होमवर्क की प्रवृत्ति आज एक गंभीर चुनौती बन चुकी है, जिसकी जिम्मेदारी सामूहिक है।
डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि कोरबा की आर्थिक प्रगति के साथ शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ा है, जिससे कोचिंग एक फैशन का रूप लेती जा रही है और हर परिवार उच्च शिक्षा की ओर बढ़ना चाहता है।
उन्होंने 1993 में तत्कालीन राज्यपाल शफी कुरैशी के जमनीपाली प्रवास और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के कई कार्यक्रमों के आयोजन का भी जिक्र किया। इस दौरान तत्कालीन विधायक बनवारीलाल अग्रवाल के सहयोग को भी उन्होंने याद किया।
कार्यक्रम में डीपीएस के वर्तमान प्राचार्य डॉ. सतीश शर्मा ने भी विचार रखे। इस अवसर पर मिलन अग्रवाल, साहिल खेत्रपाल सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।



