
बिलासपुर। कभी छत्तीसगढ़ के जंगलों में सहज उपलब्ध रहने वाली बोहार भाजी bohar bhaji आज संकट की कगार पर है। बीते वर्ष जो भाजी 230 से 250 रुपए किलो बिक रही थी, इस साल उसकी कीमत 270 से 300 रुपए किलो तक पहुंच गई है। जानकारों का कहना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो आने वाले समय में दाम और बढ़ सकते हैं।

वन विभाग और स्थानीय स्रोतों के अनुसार बोहार भाजी के वृक्ष अब प्रदेश के केवल छह जिलों तक सीमित रह गए हैं। इनमें गरियाबंद, मैनपुर, मुंगेली, मरवाही, बस्तर और सरगुजा के वन क्षेत्र प्रमुख हैं। इन इलाकों से भी वृक्षों की संख्या घटने की खबरें मिल रही हैं। यही वजह है कि इसे अब संकटग्रस्त प्रजातियों की श्रेणी में रखा जाने लगा है।
इसलिए अनमोल है यह वृक्ष
बोहार के पत्ते, फल और छाल कई उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं। इसकी पत्तियों को सर्वाधिक पोषणयुक्त माना जाता है। इनमें विटामिन ए और विटामिन सी के साथ आयरन, फास्फोरस और फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। शोधों में इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण भी सामने आए हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं।
औषधीय गुणों से भरपूर
आयरन की अधिकता के कारण यह एनीमिया की रोकथाम में सहायक मानी जाती है। कैल्शियम और फास्फोरस हड्डियों और दांतों को मजबूती देते हैं। डाइटरी फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और कब्ज से राहत दिलाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इसका सेवन डायबिटीज नियंत्रण में भी सहायक है। वहीं पत्तियों का लेप त्वचा रोगों में लाभकारी माना जाता है।
क्यों बन रही है संकटग्रस्त प्रजाति
विशेषज्ञों के अनुसार संरक्षण की अनदेखी इस वृक्ष के लिए सबसे बड़ा खतरा है। अब तक इसे बड़े स्तर पर पौधरोपण योजनाओं में शामिल नहीं किया गया। अवैध कटाई एक कारण है, लेकिन जिन क्षेत्रों में यह अधिक मात्रा में पाया जाता है, वहां खनिज उत्खनन को प्राथमिकता मिलने से प्राकृतिक आवास लगातार सिमट रहा है।
संरक्षण ही एकमात्र विकल्प
बीटीसी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर के साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री) अजीत विलियम्स के अनुसार, बोहार भाजी केवल एक पारंपरिक वन उत्पाद नहीं है, बल्कि पोषण, औषधीय उपयोग और स्थानीय आजीविका से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रजाति है। प्राकृतिक वनों में इसकी तेजी से घटती संख्या गंभीर संकेत है।
उनका कहना है कि यदि शीघ्र ही समुदाय आधारित संरक्षण, नर्सरी उत्पादन और कृषि-वानिकी मॉडल में इसे शामिल कर संवर्धन नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह दुर्लभ श्रेणी में पहुंच सकती है। इसके साथ ही बाजार में इसकी कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल सकता है।बोहार भाजी आज सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि संरक्षण की पुकार बन चुकी है।



