Chhattisgarh Film City: नवा रायपुर की चित्रोत्पला फिल्म सिटी परियोजना पर 40 हेक्टेयर चराई भूमि को लेकर विवाद, निजी कंपनी को LOA पर सवाल और 15 दिन में हाईकोर्ट जाने की चेतावनी।
नवा रायपुर।Chhattisgarh Film City: छत्तीसगढ़ की महत्वाकांक्षी चित्रोत्पला फिल्म सिटी परियोजना अब विकास से ज्यादा विवाद को लेकर सुर्खियों में है। नवा रायपुर में फिल्म सिटी के लिए निजी कंपनी को जारी लेटर ऑफ अवार्ड (LOA) पर गंभीर सवाल उठाते हुए शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार साहू ने शासन से टेंडर निरस्त करने की मांग की है। मांग पूरी नहीं हुई तो 15 दिन बाद बिलासपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने की चेतावनी दी गई है।
चराई की जमीन पर कमर्शियल प्रोजेक्ट का आरोप
शिकायत में दावा किया गया है कि ग्राम माना, तूता और निमोरा की 40 हेक्टेयर से अधिक भूमि राजस्व रिकॉर्ड में ग्रामीणों के पशुओं की चराई और निस्तार के लिए दर्ज रही है। आरोप है कि वर्ष 2006 में तत्कालीन अपर कलेक्टर रायपुर के आदेश से यह भूमि पर्यटन विभाग को पिकनिक स्पॉट विकसित करने की शर्त पर दी गई थी।
अब इसी जमीन पर फिल्म सिटी परियोजना विकसित करने और उसे निजी कंपनी के जरिए व्यावसायिक रूप देने को लेकर आपत्ति जताई गई है।
21 नवंबर 2025 का LOA बना विवाद की जड़
शिकायत के मुताबिक, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने 21 नवंबर 2025 को महाराष्ट्र की कंपनी मेसर्स इंदंददीप इंफ्रा इंडिया लिमिटेड को DBFOT मॉडल पर फिल्म सिटी के लिए LOA जारी किया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस प्रक्रिया में स्थानीय कला, संस्कृति, ग्रामीणों के पारंपरिक अधिकार और मूल निवासियों के हितों की अनदेखी हुई है।
नर्सरी और पर्यावरण पर भी सवाल
विवाद सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है। शिकायत में वन विभाग की नर्सरी और वृक्षारोपण क्षेत्र से जुड़े निर्देशों की अनदेखी का भी आरोप लगाया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि फिल्म सिटी के विकास की कीमत कहीं पर्यावरण और ग्रामीणों के पारंपरिक अधिकारों को तो नहीं चुकानी पड़ेगी?
टेंडर रद्द करो, जमीन निस्तार के लिए लौटाओ
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि कथित तौर पर विवादित भूमि से जुड़े टेंडर/आवंटन की समीक्षा कर उसे निरस्त किया जाए और जमीन को ग्रामीणों के पारंपरिक निस्तार एवं सामुदायिक उपयोग के लिए बहाल किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला
शिकायत में सुप्रीम कोर्ट के जगपाल सिंह बनाम पंजाब राज्य (2011) मामले का हवाला देते हुए सामुदायिक उपयोग की जमीनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया है।
₹93.57 करोड़ की फिल्म सिटी, अब सवालों के घेरे में
चित्रोत्पला फिल्म सिटी के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने विशेष सहायता योजना 2024-25 के तहत ₹93.57 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी थी। वहीं ट्राइबल एवं कल्चर कन्वेंशन सेंटर के लिए ₹50.84 करोड़ की स्वीकृति बताई गई है। निविदा प्रक्रिया के बाद निजी कंपनी का चयन उच्चतम राजस्व शेयरिंग बोलीदाता के रूप में किया गया।
अब शिकायत और कानूनी चुनौती की चेतावनी के बाद करोड़ों की यह महत्वाकांक्षी परियोजना नए सवालों के घेरे में है।
शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार साहू का कहना है कि ग्रामीणों की भावना, पर्यावरण और स्थानीय हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। 15 दिनों में आवंटन निरस्त कर निस्तार बहाल नहीं हुआ तो हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।











