
Raipur Nakti Land Controversy: रायपुर। धरसींवा ब्लॉक के ग्राम नकटी में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद अब एक नया और बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। जिस बेशकीमती सरकारी भूमि से पिछले दिनों गरीबों के आशियाने उजाड़े गए थे, अब उसी जमीन पर विधायकों और सांसदों (VVIPs) को भूखंड (प्लॉट) आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की चर्चा है। हालांकि, इस संवेदनशील मामले पर फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन कयासों के बाजार ने प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है।
Raipur Nakti Land Controversy: गरीबों के लिए बुलडोजर, रसूखदारों के लिए जमीन..ये कौन सा मॉडल
इस मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि प्रशासन ने ग्राम नकटी में सालों से रह रहे गरीब परिवारों को यह कहकर बेदखल कर दिया कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं होगा। उस कार्रवाई के कारण कई परिवारों के सिर से छत छिन गई। लेकिन अब उसी जमीन को जनप्रतिनिधियों को बांटने की तैयारी चल रही है।
विपक्षी सवाल उठा रहे हैं कि प्रदेश सरकार इस ममाले में दोहरे मापदंड चला रही है। यह सरकार का नया मॉडल है, जहां गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलता है और रसूखदारों के लिए सरकारी जमीन के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। जनता पूछ रही है कि क्या कानून की परिभाषा सिर्फ गरीबों के लिए है और प्रभावशाली लोगों के लिए अलग नियम हैं?
Raipur Nakti Land Controversy: कांग्रेस का सवाल: बड़े उद्योगों पर मेहरबानी क्यों?
इस मामले में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रशासन की निष्पक्षता पर भी उंगली उठाई है। नेताओं का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराना चाहती है, तो वर्षों से सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा जमाए बैठे बड़े उद्योगों और रसूखदार संस्थानों के खिलाफ ऐसी सख्ती क्यों नहीं दिखाई जाती? आखिर प्रशासन का बुलडोजर सिर्फ गरीबों की झोपड़ियों तक ही सीमित क्यों रह जाता है?
फिलहाल यदि प्रशासन भूखंड आवंटन का यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। नकटी की घटना से पहले ही स्थानीय लोगों में नाराजगी है, और अब रसूखदारों को जमीन देने का यह नया विवाद सरकार की ‘गरीब हितैषी’ छवि को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।






