Breaking : कोरबा में आरटीई का बड़ा खेल उजागर: 129 छात्र दिखाकर लाखों निकाले, मान्यता रद्द करने की कार्रवाई शुरू..नियमों को दरकिनार कर राशि आहरित करने का आरोप, 11.36 लाख की क्षति… 3.27 लाख की वसूली के आदेश
Korba RTE Scam Exposed: School Accused of Claiming Funds for 129 Fake Students, ₹11.36 Lakh Loss Reported
कोरबा। शिक्षा के अधिकार कानून के नाम पर बड़ा खेल सामने आया है। तुलसीनगर स्थित कौशिल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में छात्र संख्या बढ़ाकर और रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर शासन से लाखों रुपये की राशि आहरित किए जाने का मामला उजागर हुआ है। जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय की मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा लोक शिक्षण संचालनालय को भेज दी है। साथ ही 3 लाख 27 हजार 208 रुपये की वसूली के निर्देश दिए गए हैं।
नियम क्या कहते हैं और हुआ क्या
आरटीई अधिनियम 2009 तथा राज्य शासन के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार निजी विद्यालयों को पोर्टल पर पंजीकृत एवं सत्यापित विद्यार्थियों के आधार पर ही प्रतिपूर्ति राशि दी जाती है। छात्र संख्या, आधार पंजीयन, उपस्थिति और अध्ययनरत स्थिति का ऑनलाइन मिलान अनिवार्य है।
लेकिन जांच में सामने आया कि विद्यालय ने सत्र 2023-24 में कक्षा 9वीं से 12वीं तक 129 विद्यार्थियों की सूची प्रस्तुत की, जिनमें 43 को आरटीई के तहत प्रवेशित बताया गया। जबकि आरटीई पोर्टल में उसी सत्र के लिए केवल 56 विद्यार्थियों की स्वीकृति दर्ज थी। रिकॉर्ड मिलान में 13 विद्यार्थियों की जानकारी सूची में नहीं पाई गई। इस अंतर और कथित गलत प्रस्तुतिकरण से शासन को लगभग 11 लाख 36 हजार 336 रुपये की वित्तीय क्षति का उल्लेख जांच रिपोर्ट में किया गया है।
हाईकोर्ट की निगरानी में जांच
मामला उच्च न्यायालय बिलासपुर तक पहुंचा। न्यायालय के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी से विस्तृत जांच कराई। जांच में यह पाया गया कि विद्यार्थियों से संबंधित मूल जानकारी, आधार पंजीयन और वास्तविक अध्ययन स्थिति का सही विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया, जबकि आरटीई मद की राशि आहरित की गई।
18 विद्यार्थियों के नाम पर वर्षों तक राशि
जांच रिपोर्ट में सत्र 2011-12 से 2023-24 के बीच 18 विद्यार्थियों के नाम पर प्रतिपूर्ति राशि लेने का उल्लेख है। कई मामलों में विद्यार्थी अन्य स्कूलों में अध्ययनरत पाए गए। कुछ के दस्तावेज और आधार विवरण उपलब्ध नहीं कराए गए। उपस्थिति पंजी और अंकसूची में भी गंभीर विसंगतियां सामने आईं। कुछ विद्यार्थियों ने संस्था में प्रारंभिक वर्षों में पढ़ाई की, लेकिन उन्हें बाद के सत्रों तक अध्ययनरत दर्शाकर राशि प्राप्त की गई।जानकारी के अनुसार जिन विद्यार्थियों के नाम पर अनियमितता पाई गई उनमें कु. भाव्या कंवर, पीहू महंत, महादेव हलधर, सोनम चौहान, शिवम श्रीवास, अयान साहू, मेधा यादव, रोशन साहू, सौम्यल गिरी, आर्यन जांगड़े, ज्योति चतुर्वेदी, अतुल समुंद्रे, मोहिनी समुंद्रे, मीनाक्षी तिवारी, आकाश रजक, निकिता सहीस, साक्षी जांगड़े और श्रुति घृतलहरें शामिल हैं।
दस्तावेज ‘गुम’ होने की देरी से सूचना
जांच के दौरान कुछ विद्यार्थियों के दस्तावेज गुम होने की बात कही गई और इसकी सूचना 12 जनवरी 2026 को थाने में दी गई। सवाल यह है कि यदि दस्तावेज पूर्व में ही उपलब्ध नहीं थे तो समय पर रिपोर्ट क्यों दर्ज नहीं कराई गई। जांच रिपोर्ट में इसे गंभीर लापरवाही माना गया है।
3.27 लाख की वसूली, मान्यता पर तलवार
जांच अधिकारी ने 3 लाख 27 हजार 208 रुपये की वसूली योग्य राशि चिन्हित की है और इसे चालान के माध्यम से शासकीय कोष में जमा कराने की अनुशंसा की है। गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय की मान्यता समाप्त करने और यू-डाइस कोड बंद करने की अनुशंसा की है। संबंधित सूचना उच्च न्यायालय बिलासपुर, माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर, कलेक्टर कोरबा और पुलिस अधीक्षक को भेजी गई है।
जवाबदेही तय होगी या नहीं?
आरटीई व्यवस्था का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाना है। ऐसे में यदि छात्र संख्या और रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर प्रतिपूर्ति राशि ली जाती है तो यह सीधे तौर पर कानून की भावना के विपरीत है। अब निगाहें लोक शिक्षण संचालनालय के अंतिम निर्णय पर हैं। यह मामला सिर्फ एक विद्यालय तक सीमित नहीं, बल्कि जिले में निजी स्कूलों की आरटीई प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल है।



