Chhattisgarh High Court: हाईकोर्ट में बड़ा फेरबदल! चीफ जस्टिस ने बदले पोर्टफोलियो जज, कोरबा की जिम्मेदारी जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास को

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Chhattisgarh High Court: नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू, 12 जजों को अलग-अलग सिविल जिलों की कमान; देखें किस जज को मिला कौन सा जिला

 

बिलासपुर। Chhattisgarh High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल हुआ है। चीफ जस्टिस के अनुमोदन के बाद प्रदेश के सिविल जिलों के पोर्टफोलियो जजों के आवंटन में बदलाव किया गया है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव द्वारा जारी आदेश के बाद नई जिम्मेदारियां तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।

 

Chhattisgarh High Court: नई व्यवस्था में हाईकोर्ट के न्यायाधीशों को प्रदेश के अलग-अलग सिविल जिलों का पोर्टफोलियो सौंपा गया है। इस बदलाव में कोरबा जिले की जिम्मेदारी जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास को मिली है। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी नए पोर्टफोलियो जज निर्धारित किए गए हैं।

 

किस जज को मिली किस जिले की जिम्मेदारी?

 

– जस्टिस पार्थ प्रतीक साहू — रायपुर, जांजगीर-चांपा और सरगुजा (अंबिकापुर)

– जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास — राजनांदगांव, बेमेतरा और कोरबा

– जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी — दुर्ग और बालोद

– जस्टिस सचिन सिंह राजपूत — रायगढ़ और महासमुंद

– जस्टिस राकेश मोहन पांडे — बस्तर (जगदलपुर) और दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा)

– जस्टिस संजय कुमार जायसवाल — मुंगेली और कोंडागांव

– जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल — बिलासपुर और धमतरी

– जस्टिस बिभू दत्त गुरु — सूरजपुर और कोरिया (बैकुंठपुर)

– जस्टिस अमितेश किशोर प्रसाद — बलौदाबाजार और जशपुर

– जस्टिस संतोष शर्मा — कबीरधाम (कवर्धा)

– जस्टिस सुषमा सावंत — उत्तर बस्तर (कांकेर)

– जस्टिस सुधीर कुमार — बलरामपुर-रामानुजगंज

 

तत्काल प्रभाव से लागू हुई नई व्यवस्था

 

आदेश के अनुसार पोर्टफोलियो जजों के नए आवंटन को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। आदेश की प्रतियां संबंधित जिला एवं सत्र न्यायालयों, फैमिली कोर्ट्स और प्रशासनिक विभागों को भी सूचनार्थ भेजी गई हैं।

 

कोरबा पर खास नजर

 

नई सूची में कोरबा, राजनांदगांव और बेमेतरा का पोर्टफोलियो जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास को सौंपा गया है। ऐसे में कोरबा न्यायिक व्यवस्था से जुड़े प्रशासनिक मामलों में अब पोर्टफोलियो जज के तौर पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

 

हाईकोर्ट की यह नई प्रशासनिक व्यवस्था जिलों के न्यायिक कामकाज की निगरानी और संबंधित न्यायिक संस्थानों से समन्वय के लिहाज से अहम मानी जा रही है।

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