कोरबा, 11 सितंबर। OPS Movement : छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी के करीब 10 हजार अधिकारी-कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन का आगाज हो गया है। 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त अधिकारी-कर्मचारियों को पुरानी पेंशन से बाहर रखे जाने के विरोध में संयुक्त अधिकार मंच के आह्वान पर शुक्रवार को प्रदेशभर में आंदोलन के पहले चरण की शुरुआत हुई। DSPM ताप विद्युत गृह और कोरबा वेस्ट पावर प्लांट में बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी जुटे और संयुक्त आमसभा के जरिए OPS लागू करने की मांग बुलंद की।
DSPM और कोरबा वेस्ट में गूंजी OPS की आवाज
श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह और कोरबा वेस्ट पावर प्लांट के मुख्यालय परिसर में आयोजित संयुक्त आमसभा में कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन को लेकर अपनी मांग मजबूती से रखी। अधिकार मंच ने कहा कि बिजली व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में अधिकारी-कर्मचारी कठिन और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में लगातार काम करते हैं। ऐसे में उनके भविष्य की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन और कंपनी प्रबंधन की जिम्मेदारी है।
अधिकारी-कर्मचारियों ने कहा कि OPS सिर्फ पेंशन व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित भविष्य से जुड़ा सवाल है। मंच ने स्पष्ट किया कि 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन से वंचित रखना उनके भविष्य को लेकर गंभीर चिंता का विषय है।
12 संगठनों ने एक मंच पर आकर किया संघर्ष का ऐलान
पुरानी पेंशन की मांग को लेकर पावर कंपनी के 12 अधिकारी-कर्मचारी संगठनों ने संयुक्त अधिकार मंच के बैनर तले एकजुटता दिखाई है। इनमें अभियंता संघ, डिप्लोमा इंजीनियर संगठन, आरक्षित वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संघ, फेडरेशन-01, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन, फेडरेशन-56, तकनीकी एकता यूनियन, ऑफिसर रीजनल एसोसिएशन, तकनीकी कर्मचारी संघ, डॉक्टर एसोसिएशन और बिजली मजदूर संघ महासंघ सहित अन्य संबद्ध संगठन शामिल हैं। मंच ने कहा कि OPS की लड़ाई किसी एक संगठन की नहीं है, बल्कि पावर कंपनी के हजारों अधिकारी-कर्मचारियों के सुरक्षित भविष्य की सामूहिक लड़ाई है। सभी संगठनों ने एक स्वर में पुरानी पेंशन लागू करने की मांग उठाई है।

11 सितंबर से चरणबद्ध आंदोलन, जनप्रतिनिधियों को सौंपेंगे ज्ञापन
11 सितंबर से शुरू हुए आंदोलन के पहले चरण में प्रदेश के विभिन्न रीजन और क्षेत्रीय मुख्यालयों में संयुक्त आमसभाएं आयोजित की जा रही हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए कंपनी प्रबंधन के सामने पुरानी पेंशन लागू करने की मांग रखते हुए ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं।
आंदोलन के अगले चरण में मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर करीब 10 हजार पावर कंपनी अधिकारी-कर्मचारियों के लिए OPS लागू करने की मांग रखी जाएगी। अधिकार मंच ने संकेत दिया है कि मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
19 सितंबर को समीक्षा बैठक, 5 अक्टूबर को रायपुर में महाप्रदर्शन
अधिकार मंच की 19 सितंबर को रायपुर में समीक्षा बैठक होगी। इसमें 11 सितंबर से शुरू हुए आंदोलन की स्थिति और शासन व कंपनी प्रबंधन के रुख की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।
वहीं, आंदोलन का बड़ा चरण 5 अक्टूबर 2026 को रायपुर के डांगरिया स्थित कंपनी मुख्यालय में विशाल प्रदर्शन और आमसभा के रूप में आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रदेशभर से पावर कंपनी के अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में राजधानी पहुंचेंगे। मंच ने कहा है कि यदि 5 अक्टूबर तक OPS लागू करने की दिशा में ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक एवं निर्णायक बनाया जाएगा।

‘OPS लागू होने तक संघर्ष जारी रहेगा’
अधिकार मंच ने कहा कि बिजली कर्मचारी प्रदेश की आर्थिक और औद्योगिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण व्यवस्था को बनाए रखने में हजारों अधिकारी-कर्मचारी लगातार अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन का सवाल उनके सुरक्षित भविष्य से सीधे जुड़ा है।
मंच ने शासन और पावर कंपनी प्रबंधन से करीब 10 हजार अधिकारी-कर्मचारियों के हित में जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है। अधिकार मंच का कहना है कि “पुरानी पेंशन कोई खैरात नहीं, कर्मचारियों के सुरक्षित भविष्य का अधिकार है।” 12 संगठनों की एकजुटता के साथ मंच ने OPS लागू होने तक आंदोलन जारी रखने का संदेश दिया है।











