कोरबा, 06 सितंबर।Korba Court News : छत्तीसगढ़ के कोरबा से सरकारी वाहन और मुआवजा भुगतान से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है। वर्ष 2023 में वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात पुलिस विभाग की बिना बीमा मिनी बस की टक्कर से दो युवकों की मौत के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, कोरबा ने पीड़ित परिवारों को निर्धारित ₹43 लाख 14 हजार 200 रुपये का मुआवजा समय पर नहीं दिए जाने पर छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) और कोरबा पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया है।
2023 में बाइक सवार दो युवकों की हुई थी मौत
यह मामला 27 सितंबर 2023 की शाम करीब 6:30 बजे का है। रायगढ़ जिले के खरसिया थाना क्षेत्र के पिपरिया-परपोड़ी मुख्य मार्ग पर पुलिस विभाग की मिनी बस ने बाइक सवार दो युवकों को टक्कर मार दी थी। हादसे में जांजगीर-चांपा जिले के हेडसपुर निवासी बैजनाथ कंवर और रवि यादव की मौत हो गई थी।
जानकारी के मुताबिक हादसे के समय बैजनाथ कंवर बाइक चला रहे थे और रवि यादव पीछे बैठे थे। पुलिस विभाग की वीवीआईपी प्रबंधन ड्यूटी में लगी मिनी बस ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसा इतना गंभीर था कि बैजनाथ कंवर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल रवि यादव ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
कोर्ट ने तय किया ₹43.14 लाख मुआवजा, 9% ब्याज भी देना था
दोनों मृतकों के परिवारों ने आर्थिक सहायता के लिए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, कोरबा में अलग-अलग दावे प्रस्तुत किए थे। प्रथम अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की पीठासीन अधिकारी गरिमा शर्मा ने 14 जनवरी 2026 को दोनों मामलों में फैसला सुनाया।
अधिकरण ने बैजनाथ कंवर के आश्रितों के लिए ₹26 लाख 9 हजार 200 रुपये और रवि यादव के आश्रितों के लिए ₹17 लाख 5 हजार रुपये मुआवजा निर्धारित किया। दोनों मामलों में कुल राशि ₹43 लाख 14 हजार 200 रुपये रही। इसके साथ ही मुआवजा राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया गया था। न्यायालय ने निर्धारित राशि एक महीने के भीतर पीड़ित परिवारों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन पांच महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद मुआवजा राशि का भुगतान नहीं हो सका।
मिनी बस का बीमा खत्म था, DGP और SP को बनाया गया था पक्षकार
अधिकरण ने दुर्घटना के लिए मिनी बस चालक की लापरवाही को जिम्मेदार माना। न्यायालय के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त वाहन पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़ के नाम पर पंजीकृत था और दुर्घटना के समय उसकी बीमा अवधि समाप्त हो चुकी थी।
इसी वजह से पुलिस महानिदेशक और कोरबा पुलिस अधीक्षक को भी मामले में पक्षकार बनाया गया था। मुआवजा आदेश का पालन नहीं होने के बाद पीड़ित पक्ष के अधिवक्ताओं ने राशि की वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की।
मुआवजा नहीं मिला तो DGP-SP कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश
मुआवजा राशि का भुगतान नहीं होने पर अदालत ने अब सख्त कार्रवाई की है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने DGP और कोरबा SP कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया है। इस आदेश के बाद पुलिस विभाग के सामने निर्धारित मुआवजा राशि और ब्याज का भुगतान करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
बैजनाथ कंवर के मामले में उनकी पत्नी सुजाता कंवर, माता-पिता और दो नाबालिग बच्चों ने दावा प्रस्तुत किया था। वहीं रवि यादव के परिवार की ओर से उनकी पत्नी जुगमणी और दो नाबालिग बच्चों ने मुआवजे की मांग की थी। अदालत की कार्रवाई को मृतकों के परिवारों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही यह मामला सरकारी वाहनों के बीमा, सुरक्षा मानकों और दुर्घटना के बाद जवाबदेही को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।












