नई दिल्ली, 05 सितंबर। Congress New Appointments : कांग्रेस ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए कई राज्यों के लिए AICC जनरल सेक्रेटरी इंचार्ज और प्रभारियों की नई नियुक्तियां की हैं। कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से 5 सितंबर को जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, सभी नई जिम्मेदारियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। इस फेरबदल में छत्तीसगढ़ और असम से जुड़ा बदलाव सबसे अहम माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में सुखदेव भगत को मिली बड़ी जिम्मेदारी
कांग्रेस ने सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का नया प्रभारी नियुक्त किया है। उनके सामने प्रदेश कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। नई नियुक्ति के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस में उनकी भूमिका पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।
वहीं छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को असम का AICC जनरल सेक्रेटरी इंचार्ज बनाया गया है। पार्टी के इस फैसले को संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
भूपेश बघेल से सुरजेवाला तक, इन नेताओं को मिला नया प्रभार
कांग्रेस की ओर से जारी सूची के अनुसार, भूपेश बघेल को असम, रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात और सचिन पायलट को पंजाब का जनरल सेक्रेटरी इंचार्ज नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़, डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद को महाराष्ट्र और पी. वी. मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात के साथ कर्नाटक के जनरल सेक्रेटरी इंचार्ज की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
कांग्रेस संगठन में कई नेताओं की भूमिका बदली
संगठनात्मक फेरबदल के दौरान कांग्रेस ने जिम्मेदारी से मुक्त किए गए जनरल सेक्रेटरी इंचार्ज के योगदान की भी सराहना की है। इनमें जितेंद्र सिंह, रमेश चेन्निथला और मणिकम टैगोर का नाम शामिल है। वहीं मुकुल वासनिक AICC के जनरल सेक्रेटरी के पद पर बने रहेंगे। पार्टी ने नए प्रभारियों की नियुक्ति के साथ संगठन में जिम्मेदारियों का नया संतुलन तैयार किया है।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में बदलाव से बढ़ी राजनीतिक हलचल
सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाए जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में इस बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। राज्य में पार्टी संगठन के सामने आगामी राजनीतिक चुनौतियों के बीच नए प्रभारी की रणनीति महत्वपूर्ण मानी जाएगी।
दूसरी ओर, भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी मिलने से उनकी राष्ट्रीय संगठनात्मक भूमिका भी बढ़ी है। कांग्रेस के इस बड़े फेरबदल के बाद अब नजर इस बात पर होगी कि नए प्रभारी अपने-अपने राज्यों में संगठन को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।













