Korba police suspension Story’ : “दामन में दाग लगे तो अपनों को भी नहीं बख्शते हुक्मरान, ये पुलिस है हुज़ूर… जहाँ अपने भी बेगाने नज़र आते हैं!”
यह महज़ कोई शेरो-शायरी नहीं, बल्कि उस ताज़ा प्रशासनिक भूचाल की बानगी है, जहाँ आठ पुलिसकर्मियों को महकमे ने रातों-रात निलंबित कर दिया। इनका गुनाह बस इतना था कि ये ट्रेन की पटरियों को दरकिनार कर सीधे बादलों में सैर करने यानी फ्लाइट से आरोपी को पकड़ने निकल पड़े।
अब जनता इस पूरी पटकथा के असली डायरेक्टर की तलाश में है, क्योंकि पर्दे के पीछे कुछ तो ऐसा है जिसे छिपाने की पुरजोर कोशिश हो रही है। इस हड़बड़ी में हुई कार्रवाई पर कानून के जानकार भी चुटकी लेते हुए कह रहे हैं “चेहरा छुपा लिया है किसी ने हिजाब में, लग जाती वरना आग उनके शबाब में…”
वैसे, बिना अनुमति के ट्रेन की जगह हवाई यात्रा करना नियम-विरुद्ध ज़रूर है, पर सवाल यह उठता है कि क्या इस पूरे प्रदेश में सिर्फ कटघोरा की खाकी ने ही आसमान छुआ है? उन रसूखदार साहबों का क्या जो हर साल विदेश सैर पर निकल जाते हैं, उनका हिसाब कौन रखेगा? अंदरखाने के सूत्र तो यही इशारा कर रहे हैं कि यह निलंबन दरअसल बड़े और ताक़तवर अफ़सरों की कुर्सी बचाने के लिए आठ मोहरों की बली देने का एक सोचा-समझा शिगूफा है।
फिलहाल निलंबन का फरमान हवा में तैर रहा है, लेकिन असली तस्वीर अभी भी कोहरे में लिपटी है। यही अधूरापन इस ‘हाई-फ्लाई’ सफर को शहर की सबसे दिलचस्प चर्चा बनाए हुए है। अब देखना यह है कि जांच की यह उड़ान महज़ इन आठ जवानों पर आकर दम तोड़ती है या उस ‘ग्राउंड जीरो’ तक पहुँचती है जहाँ से इस पूरे हवाई सफर की असली स्क्रिप्ट लिखी गई थी। आख़िरकार, सवाल सिर्फ आसमान में उड़ने वालों का नहीं, बल्कि उड़ान की मंजिल और रूट तय करने वाले ‘मास्टमाइंड्स’ का भी है!












