MP High Court : नोटरी नहीं करा सकता कोर्ट मैरिज, ₹2 लाख जमा करने के बाद ही काम की इजाजत

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ग्वालियर। MP High Court मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने नोटरी द्वारा विवाह संबंधी दस्तावेज को नोटरीकृत करने के मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नोटरी को विवाह अधिकारी या विवाह पंजीयन प्राधिकारी के रूप में कार्य करने का अधिकार नहीं है।

मामला राघवेंद्र समाधिया, नोटरी पब्लिक दतिया से जुड़ा है। दरअसल, बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि एक दंपती कोर्ट मैरिज के लिए दतिया जिला न्यायालय पहुंचे थे। वहां एक अधिवक्ता ने उनसे कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए और उन्हें बताया कि उनका विवाह हो गया है। मामले की केस डायरी में विवाह संबंधी एक दस्तावेज मिला, जिसे नोटरी राघवेंद्र समाधिया ने नोटरीकृत किया था।

इसके बाद कोर्ट ने नोटरी को नोटिस जारी किया। 28 जुलाई 2026 को पेश हुए राघवेंद्र समाधिया ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि उन्होंने भूलवश विवाह संबंधी दस्तावेज को नोटरीकृत कर दिया था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें केंद्र सरकार के 10 अक्टूबर 2024 के कार्यालय ज्ञापन की जानकारी थी और वे विवाह अधिकारी के रूप में कार्य करने के लिए अधिकृत नहीं हैं।

कोर्ट से मांगी माफी

नोटरी ने हाईकोर्ट में बिना शर्त माफी मांगते हुए भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कोर्ट से कार्यवाही समाप्त करने का अनुरोध भी किया।

सुनवाई के दौरान राघवेंद्र समाधिया ने अपनी bona fide साबित करने के लिए ₹2 लाख बार के कल्याण के लिए जमा करने और अपने कार्यस्थल पर एक बोर्ड लगाने की सहमति दी। इस बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखा जाएगा कि विवाह संबंधी दस्तावेजों का नोटरीकरण कानूनन नहीं किया जा सकता।

₹2 लाख जमा करने और बोर्ड लगाने के बाद ही काम

जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की पीठ ने माफी स्वीकार करते हुए एक और अवसर दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि नोटरी का काम दोबारा शुरू करने से पहले राघवेंद्र समाधिया को अपने कार्यस्थल पर ऐसा बोर्ड लगाना होगा, जिसमें विवाह संबंधी दस्तावेजों के नोटरीकरण से इनकार की बात स्पष्ट हो।

इसके साथ ही उन्हें ₹2 लाख की राशि हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करनी होगी। यह राशि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, ग्वालियर द्वारा बार के सेवा एवं कल्याण कार्यों में इस्तेमाल की जाएगी।

कोर्ट ने सख्त चेतावनी दी कि राशि जमा करने से पहले यदि उन्होंने नोटरी का कोई काम किया तो इसे कोर्ट के आदेश की खुली अवहेलना माना जाएगा और उन्हें स्थायी रूप से नोटरी का कार्य करने से रोका जा सकता है।

सभी नोटरी को भेजा जाएगा दिशा-निर्देश

कोर्ट के सामने यह भी बताया गया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया सभी नोटरी को केंद्र सरकार के 10 अक्टूबर 2024 के कार्यालय ज्ञापन की जानकारी भेजेगी। इसमें नोटरी को विवाह और तलाक से संबंधित दस्तावेज निष्पादित करने से रोका गया है।

हाईकोर्ट ने कहा कि यह कदम उन लोगों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, जो कोर्ट मैरिज की उम्मीद और विश्वास के साथ न्यायालय पहुंचते हैं। इसके बाद कोर्ट ने राघवेंद्र समाधिया के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही समाप्त कर दी और याचिका का निपटारा कर दिया।

 

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