Specific Cultural Tradition : नवरात्रि में दुर्गा पूजा से दूरी बनाता है असुर समाज, महिषासुर को पूर्वज मानकर मनाते हैं शोक

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Specific Cultural Tradition

जशपुर, 23 अगस्त। Specific Cultural Tradition : छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड में नवरात्रि के दौरान असुर समुदाय की एक विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा देखने को मिलती है। जब देश के अधिकांश हिस्सों में मां दुर्गा की पूजा और नवरात्रि उत्सव मनाया जाता है, वहीं असुर समाज के लोग महिषासुर को अपना पूर्वज मानकर उनका स्मरण और श्रद्धांजलि करते हैं।

समुदाय की मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिन उनके लिए उत्सव के नहीं, बल्कि अपने पूर्वज की स्मृति से जुड़े होते हैं। इसी वजह से समुदाय के लोग दुर्गा पूजा से दूरी बनाए रखते हैं।

असुर समाज की यह परंपरा

जशपुर के मनोरा क्षेत्र में असुर समुदाय निवास करता है। समुदाय के लोग खुद को महिषासुर का वंशज मानते हैं। उनकी पारंपरिक मान्यताओं में महिषासुर का विशेष स्थान है।

नवरात्रि के दौरान समुदाय के लोग महिषासुर का स्मरण करते हैं और अपनी परंपरा के अनुसार उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इस दौरान सामान्य तौर पर उत्सव की बजाय शोक और स्मरण पर जोर रहता है।

क्यों मनाते हैं शोक?

असुर समाज की पारंपरिक मान्यता के अनुसार, महिषासुर उनके पूर्वज थे और उनकी मृत्यु देवी दुर्गा के साथ हुए संघर्ष में हुई थी। इसी मान्यता के चलते नवरात्रि को समुदाय अपने पूर्वज की स्मृति से जोड़कर देखता है।

यही कारण है कि नवरात्रि के दौरान समुदाय के लोग दुर्गा पूजा में शामिल नहीं होते। वे महिषासुर को याद करते हुए अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन करते हैं।

जशपुर के इन गांवों में निभाई जाती है परंपरा

जशपुर जिले के हाड़ीकोना, जरहापाठ, बुर्जुपाठ और दौनापठा गांवों में असुर समुदाय के लोग रहते हैं। समुदाय के लिए महिषासुर की मान्यता उनकी धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान और परंपरा से भी जुड़ी हुई है। समुदाय के लोग अपने पूर्वज महिषासुर को सम्मान और गर्व की भावना से याद करते हैं।

दिवाली और होली में भी भैंसासुर की पूजा

असुर समाज की यह सांस्कृतिक परंपरा केवल नवरात्रि तक सीमित नहीं है। समुदाय के लोग दिवाली और होली के अवसर पर भैंसासुर की पूजा भी करते हैं। समुदाय की मान्यताएं और रीति-रिवाज पीढ़ियों से आगे बढ़ते आ रहे हैं। नवरात्रि के दौरान महिषासुर का स्मरण इसी सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अलग मान्यता, अलग परंपरा

जशपुर का असुर समाज यह दिखाता है कि भारत की जनजातीय संस्कृति कितनी विविध और बहुरंगी है। नवरात्रि को लेकर समुदाय की मान्यताएं मुख्यधारा की धार्मिक परंपराओं से अलग हैं, लेकिन उनके लिए यह पूर्वजों की स्मृति, सांस्कृतिक पहचान और परंपरा को जीवित रखने का माध्यम है।

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