छत्तीसगढ़

CG Bilaspur High Court : कोयले की धूल पर हाईकोर्ट सख्त, SECL CMD से मांगा शपथ पत्र, 31 अगस्त को फिर सुनवाई

बिलासपुर, 20 अगस्त। CG Bilaspur High Court : निर्माणाधीन ओवरब्रिज के आसपास कोयला परिवहन के दौरान उड़ने वाली धूल और इससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने SECL के CMD को नया व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने जानना चाहा है कि कोयले की धूल के प्रसार को रोकने और प्रभावित क्षेत्र के लोगों की स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई के लिए 31 अगस्त 2026 की तारीख तय की गई है।

SECL को देना होगा ठोस जवाब

कोर्ट के निर्देश के मुताबिक SECL के CMD को दाखिल किए जाने वाले शपथपत्र में केवल औपचारिक या सामान्य जानकारी देना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें यह बताना होगा कि संबंधित क्षेत्र में कोयला धूल को नियंत्रित करने के लिए कौन-कौन से विशिष्ट उपाय किए गए हैं।

इसके साथ ही प्रभावित बस्ती के रहवासियों के स्वास्थ्य और कल्याण की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का भी विस्तृत ब्यौरा देना होगा।

भारी वाहनों और कोयला ट्रकों पर हाईकोर्ट की नजर

हाईकोर्ट ने विशेष रूप से भारी वाहनों की आवाजाही और ट्रकों के जरिए हो रहे कोयला परिवहन को लेकर जानकारी मांगी है।

निर्माणाधीन ओवरब्रिज के आसपास भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क की धूल और कोयले के कण हवा में फैलने की शिकायतों को लेकर कोर्ट ने स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

अब SECL को यह बताना होगा कि धूल के प्रसार को कम करने के लिए परिवहन मार्ग, वाहनों और प्रभावित क्षेत्र में किस तरह के नियंत्रणात्मक उपाय किए जा रहे हैं।

30 जुलाई के आदेश के बाद जारी हुआ था नोटिस

मामले की पिछली कार्यवाही में 30 जुलाई 2026 के कोर्ट के आदेश के अनुपालन में राज्य सरकार की ओर से SECL के अधिकारियों को नोटिस दिए जाने की जानकारी अदालत को दी गई।

सुनवाई के दौरान SECL की ओर से पेश अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। इसके बाद डिवीजन बेंच ने SECL के प्रबंध निदेशक को नया व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

31 अगस्त को फिर होगी सुनवाई

अब मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी। उस दौरान कोर्ट के सामने SECL के CMD का शपथपत्र होगा, जिसमें कोयला धूल रोकने, भारी वाहनों के संचालन और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को लेकर किए गए उपायों की जानकारी दी जानी है।हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद अब यह देखना अहम होगा कि SECL की ओर से शपथपत्र में कौन-कौन से ठोस कदम और उनकी प्रभावशीलता का विवरण दिया जाता है।

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