Target Hareli : हरेली से पहले छत्तीसगढ़ में ‘पोस्टर पॉलिटिक्स’…! राउत नाचा वाली फोटो पर बैज का तंज- ‘सरकार किस अफीम के नशे में चल रही?’
रायपुर, 10 अगस्त। Target Hareli : छत्तीसगढ़ के पहले लोक पर्व हरेली से ठीक पहले राजधानी में लगे सरकारी पोस्टर को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से जुड़े हरेली पोस्टर को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। बैज ने पोस्टर में छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर नहीं होने और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की राउत नाचा वाली तस्वीर लगाए जाने पर सवाल खड़े किए हैं।
दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि “अब सरकार कौन से अफीम के नशे में चल रही है, यह भी पता नहीं।” उन्होंने सवाल किया कि हरेली के पोस्टर में मुख्यमंत्री की तस्वीर गेड़ी वाली होनी चाहिए या राउत नाचा वाली?
हरेली के पोस्टर पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
दीपक बैज ने कहा कि सरकार को छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और लोक त्योहारों का प्रचार-प्रसार करना चाहिए, लेकिन सरकार सिर्फ पोस्टरों तक सीमित नजर आ रही है।
उन्होंने पोस्टर में छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर नहीं होने को भी मुद्दा बनाया और आरोप लगाया कि सरकार प्रदेश की संस्कृति और परंपराओं को लेकर गंभीर नहीं है।
‘हरेली में गेड़ी चढ़ते हैं, राउत नाचा नहीं’
मुख्यमंत्री की राउत नाचा वाली तस्वीर को लेकर बैज ने कहा कि राउत नाचा हरेली पर्व से जुड़ी परंपरा नहीं है, बल्कि इसे गोवर्धन पूजा और दीपावली से जुड़ी लोक परंपरा बताया। बैज के मुताबिक, हरेली पर्व पर छत्तीसगढ़ में गेड़ी चढ़ने की परंपरा है। ऐसे में पोस्टर में मुख्यमंत्री की गेड़ी चढ़ते हुए तस्वीर होनी चाहिए थी।
उन्होंने सरकार और उसके सलाहकारों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पोस्टर देखकर ऐसा लगता है कि यह तय करने में ही भ्रम है कि किस पर्व के साथ कौन-सी लोक परंपरा जुड़ी है।
हरेली से पहले पोस्टर बना सियासी मुद्दा
हरेली पर्व के ठीक पहले मुख्यमंत्री से जुड़े पोस्टर को लेकर कांग्रेस के हमले ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। कांग्रेस इसे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और लोक परंपराओं से जोड़कर सरकार को घेर रही है। वहीं, इस मुद्दे पर भाजपा की ओर से पलटवार की संभावना के बीच आने वाले दिनों में पोस्टर को लेकर सियासी बयानबाजी और तेज हो सकती है।
फिलहाल छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर और मुख्यमंत्री की राउत नाचा वाली फोटो को लेकर शुरू हुई यह बहस हरेली पर्व से पहले प्रदेश की राजनीति में नया मुद्दा बन गई है।





