
रायपुर/कोरबा। Korba Wood Smuggling कोरबा की सरकारी जमीन से काटी गई बेशकीमती साल लकड़ी की तस्करी का मामला अब बड़े नेटवर्क तक पहुंचता नजर आ रहा है। प्रमुख वन संरक्षक (पीसीसीएफ) के निर्देश पर हुई कार्रवाई में अभनपुर स्थित एक लाइसेंसशुदा सा मिल की आड़ में तीन अवैध आरा मिलों का खुलासा हुआ है। राज्य स्तरीय उड़नदस्ता की चार टीमों ने जिला वन अधिकारी (डीएफओ) के नेतृत्व में छापेमारी कर तीनों अवैध आरा मिलों को मौके पर ही सील कर दिया।
इस कार्रवाई ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कोरबा की सरकारी साल लकड़ी, जिसे वन विभाग के डिपो तक पहुंचना था, वह सैकड़ों किलोमीटर दूर अभनपुर कैसे पहुंच गई? क्या इसके पीछे सिर्फ तस्कर हैं या फिर पूरा खरीद-फरोख्त का संगठित नेटवर्क सक्रिय है? अब वन विभाग इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने में जुट गया है।
40 ट्रक लकड़ी मिलने के बाद खुला बड़ा राज
दो दिन पहले अभनपुर के समीप आमनेर गांव में करीब 40 ट्रक के बराबर अवैध साल लकड़ी का जखीरा मिलने के बाद वन विभाग ने जांच तेज कर दी। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि यह लकड़ी कोरबा जिले की शासकीय भूमि से काटकर लाई गई है। अधिकारियों का मानना है कि आमनेर में मिला लकड़ी का भंडारण और सा मिलों में चल रहा कारोबार आपस में जुड़ा हो सकता है।
लाइसेंस सही, लेकिन लकड़ी के कागजात संदेह के घेरे में
जांच के दौरान सा मिलों के लाइसेंस और मशीनें तो वैध मिलीं, लेकिन परिसर में रखी साल लकड़ी के दस्तावेजों में कई गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। वन विभाग अब खरीदी रजिस्टर, परिवहन अनुमति, स्टॉक रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों का मिलान कर यह पता लगा रहा है कि लकड़ी का वास्तविक स्रोत क्या है और परिवहन की अनुमति नियमों के तहत जारी हुई थी या नहीं।
अब खरीदार भी जांच के घेरे में
वन विभाग ने साफ कर दिया है कि जांच केवल अवैध कटाई तक सीमित नहीं रहेगी। सरकारी लकड़ी खरीदने, उसका भंडारण करने और चिराई कराने वालों की भूमिका भी खंगाली जाएगी। यानी अब पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कसने की तैयारी है।
डीएफओ बोले, दोषी मिले तो होगी कड़ी कार्रवाई
रायपुर डीएफओ लोकनाथ पटेल ने बताया कि सा मिलों के लाइसेंस वैध हैं, लेकिन लकड़ी के स्रोत और उससे जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। यदि जांच में खरीदी अवैध पाई जाती है या दस्तावेज फर्जी अथवा नियमों के विपरीत मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कोरबा की बेशकीमती साल लकड़ी जंगल से निकलकर अभनपुर की आरा मिलों तक किसके संरक्षण में पहुंची? जांच आगे बढ़ने के साथ इस संगठित नेटवर्क से जुड़े कई बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।






