Korba Breaking: हाथ में तलवार, फिर सलाखों के पीछे… लेकिन सवाल है, आखिर युवा हिंसा की राह पर क्यों?

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कोरबा।Korba Crime News एक ओर पूरा प्रदेश नशे के खिलाफ अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी ओर युवाओं के हाथों में किताबों और रोजगार के अवसरों की जगह तलवार और हथियार दिखाई देना समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।

ऐसा ही मामला रविवार को कोरबा के मानिकपुर क्षेत्र में सामने आया, जहां 19 वर्षीय युवक प्रेम कुमार साहू कथित रूप से हाथ में धारदार तलवार लेकर लोगों को डराते और दहशत फैलाते हुए मिला।

युवा पत्रकार और समाज सेवी कन्हैया सोनी की मदद से पुलिस ने नशेड़ी युवक को गिरफ्तार किया और उसके कब्जे से तलवार बरामद की। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं एवं आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।

पुलिस के अनुसार, “सजग कोरबा, सतर्क कोरबा” अभियान के तहत पिछले चार-पांच दिनों में आर्म्स एक्ट के तहत यह लगातार तीसरी बड़ी कार्रवाई है। साफ है कि हथियार लेकर सार्वजनिक स्थानों पर दहशत फैलाने वालों पर पुलिस सख्त रुख अपनाए हुए है।

सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, समाज को भी करना होगा आत्ममंथन

हर गिरफ्तारी के बाद एक बड़ा सवाल पीछे छूट जाता है। आखिर कम उम्र के युवाओं के हाथों में हथियार क्यों पहुंच रहे हैं? क्या इसकी वजह नशे की बढ़ती लत, सोशल मीडिया पर दबंगई दिखाने की होड़, गलत संगत या बेरोजगारी है?

विशेषज्ञों का मानना है कि नशा अक्सर हिंसा की पहली सीढ़ी बनता है। नशे की गिरफ्त में आया युवा जल्द ही आपराधिक प्रवृत्तियों की ओर बढ़ सकता है। ऐसे में केवल पुलिस कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं, बल्कि परिवार, समाज, स्कूल और प्रशासन को मिलकर युवाओं को सही दिशा देनी होगी।

नशा के खिलाफ अभियान और संस्कारयुक्त समाज बनाने सामूहिक प्रयास जरूरी

तलवार से कभी सम्मान नहीं मिलता, बल्कि परिवार की बदनामी और जेल की सलाखें ही मिलती हैं। यदि हम सच में अपराध मुक्त और सुरक्षित समाज चाहते हैं, तो नशा मुक्त युवा और संस्कारयुक्त समाज बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। पुलिस अपना काम कर रही है, अब समाज को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

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