
शराब के नशे में युवक ने पुलिसकर्मियों से अभद्रता की, रोजनामचा फाड़ने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास, घटना ने कानून-व्यवस्था और बढ़ते नशे पर खड़े किए सवाल।
कोरबा। Korba Kotwali Ruckus नशे की बढ़ती प्रवृत्ति अब केवल सड़कों और सार्वजनिक स्थानों तक सीमित नहीं रह गई है। सोमवार को जिला मुख्यालय की कोतवाली में हुई एक घटना ने यह संकेत दिया कि नशे का असर अब कानून-व्यवस्था के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थानों तक पहुंच चुका है। शराब के नशे में धुत एक युवक सीधे थाना परिसर में घुस गया और पुलिसकर्मियों से अभद्रता करते हुए जमकर हंगामा किया। उसने सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ की, रोजनामचा फाड़ने की कोशिश की और थाना परिसर में तोड़फोड़ कर दी।
एफआईआर के अनुसार 29 जून की दोपहर लगभग 3 बजे सहायक उपनिरीक्षक कुंवर साय थाना कोतवाली में ड्यूटी पर थे। इसी दौरान आरोपी शराब के नशे में वहां पहुंचा और बिना किसी कारण पुलिस कर्मचारियों से गाली-गलौज शुरू कर दी। उसने जान से मारने की धमकी देते हुए शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाई और थाना परिसर का माहौल बिगाड़ दिया।
महिला पुलिसकर्मियों से भी अभद्रता
आरोपी ने थाना के दस्तावेज इधर-उधर फेंक दिए और ड्यूटी पर मौजूद महिला आरक्षक सुनीता कश्यप तथा मोहर्रिर सुनीता डहरिया के साथ भी अश्लील गाली-गलौज की। उसने थाना के महत्वपूर्ण अभिलेख रोजनामचा को फाड़ने का प्रयास किया और टेबल का कांच तोड़कर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
काफी देर तक चला हंगामा
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब आरोपी अपना सिर और चेहरा दीवार पर पटकने लगा। पुलिसकर्मियों ने उसे शांत कराने की कोशिश की, लेकिन वह लगातार आक्रामक बना रहा। इस दौरान थाने में मौजूद फरियादियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। बाद में थाना प्रभारी एमबी पटेल के पहुंचने पर भी आरोपी शांत नहीं हुआ, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में आरोपी की पहचान सीतामणी निवासी राजेश चौहान के रूप में हुई। पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
सिर्फ एक घटना नहीं, गंभीर चेतावनी
यह मामला केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। जिस थाना परिसर को कानून और सुरक्षा का केंद्र माना जाता है, वहां इस तरह की घटना होना समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और उससे पैदा हो रहे दुस्साहस की ओर इशारा करता है। यदि नशे की गिरफ्त में लोग पुलिस थाने तक में उत्पात मचाने का साहस कर रहे हैं, तो यह प्रशासन और समाज दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नशे के बढ़ते प्रभाव पर केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए प्रभावी नियंत्रण, जागरूकता अभियान और सामाजिक भागीदारी की भी आवश्यकता है, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।






