बिलासपुर

Elderman List Controversy : छत्तीसगढ़ एल्डरमैन लिस्ट पर बवाल…! उपसरपंच को बना दिया एल्डरमैन…रायपुर-बिलासपुर में भी फूटा असंतोष

एक ही नेता के पास दो पद, उठे गंभीर सवाल

रायपुर/बलरामपुर, 26 जून। Elderman List Controversy : छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों के लिए जारी एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) सूची अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। बलरामपुर जिले के राजपुर नगर पंचायत में एक ऐसी नियुक्ति सामने आई है, जिसने नियमों और प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जारी सूची में अनिल तिवारी को राजपुर नगर पंचायत का एल्डरमैन मनोनीत किया गया है, जबकि वे वर्तमान में कोटा गहना ग्राम पंचायत के निर्वाचित उपसरपंच हैं। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या कोई व्यक्ति एक साथ ग्रामीण और नगरीय निकाय के दो जनप्रतिनिधि पदों पर रह सकता है।

वहीं राजधानी रायपुर में एल्डरमैन सूची में शामिल कुछ नामों को लेकर भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर हाल ही में सक्रिय हुए लोगों को प्राथमिकता दी गई है।

पंचायती राज और नगरीय निकाय नियमों के जानकारों के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति एक साथ दो संवैधानिक या जनप्रतिनिधि के पदों पर नहीं रह सकता। अनिल तिवारी पहले से ही कोटा गहना पंचायत के उपसरपंच के रूप में ग्रामीण निकाय का हिस्सा हैं।इसके बावजूद उन्हें नियमों को ताक पर रखकर राजपुर नगर पंचायत में एल्डरमैन (नगरीय निकाय) नियुक्त कर दिया गया।

स्थानीय स्तर पर विरोध

देर रात सूची जारी होने के बाद से ही इस बड़ी गड़बड़ी को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। स्थानीय लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सूची जारी करने से पहले नामों की ठीक से स्क्रूटनी (जांच) नहीं की गई, जिसके कारण यह गंभीर प्रशासनिक त्रुटि हुई है। अब देखना यह होगा कि इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन इस नियुक्ति को निरस्त करता है या संबंधित व्यक्ति को अपने एक पद से इस्तीफा देना पड़ता है।

रायपुर में ‘अपनों’ की ही नाराज़गी

छत्तीसगढ़ में लंबे समय से अटकी नगरीय निकायों के एल्डरमैनों (मनोनीत पार्षदों) की नियुक्ति की सूची जैसे ही राज्य शासन द्वारा जारी की गई, वैसे ही इसे लेकर पार्टी संगठन और कार्यकर्ताओं में असंतोष की लहर दौड़ गई है। राजधानी रायपुर में जहां कुछ चुनिंदा नामों को लेकर पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है, वहीं न्यायधानी बिलासपुर की पूरी सूची ही आपसी खींचतान के कारण विवादों में घिरकर फिलहाल अटक गई है।

रायपुर नगर निगम के लिए जारी सूची में दूसरे नंबर पर शामिल विनय ओझा के नाम को लेकर सबसे ज्यादा संग्राम छिड़ा हुआ है। सोशल मीडिया पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं ने तीखी टिप्पणियां करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को ‘बधाई’ देना शुरू कर दिया है।

विवाद की वजह

कार्यकर्ताओं का आरोप है कि विनय ओझा रायपुर के पूर्व महापौर और कांग्रेस नेता एजाज ढेबर के बेहद करीबी रहे हैं। हालांकि, वह पहले भाजपा में भी काम कर चुके हैं, लेकिन कांग्रेस कार्यकाल के बाद ऐन चुनाव के वक्त उनकी वापसी हुई थी। सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार आने पर “मौकापरस्त” लोगों को मलाई खिलाई जा रही है, जबकि सालों से पार्टी का झंडा उठाने वाले और दरी बिछाने वाले निष्ठावान कार्यकर्ता आज भी उपेक्षित हैं। इसके अलावा सूची में कुछ ऐसे नाम भी शामिल हैं जो मूल रूप से ठेकेदारी से जुड़े हैं या पहले भी पार्षद रह चुके हैं।

गुटबाजी और खींचतान के बीच अटकी सूची

रायपुर में जहां नामों के एलान के बाद बखेड़ा खड़ा हुआ, वहीं बिलासपुर में सूची जारी होने से पहले ही आंतरिक मतभेद चरम पर पहुंच गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, बिलासपुर नगर निगम के लिए तय किए जा रहे नामों पर किसी एक राय का न बन पाना ही सबसे बड़ा रोड़ा साबित हो रहा है। खबर है कि महापौर पूजा विधानी और उनके पति अशोक विधानी की ओर से कुछ नामों की पैरवी की जा रही है, जबकि स्थानीय भाजपा संगठन और क्षेत्रीय विधायक समर्थकों की अपनी अलग पसंद है।

वरिष्ठ नेताओं का हस्तक्षेप भी बेअसर

नगर निगम के भाजपा पार्षद दल और संगठन स्तर पर मतभेद इतने गहरे हैं कि प्रदेश संगठन के कुछ वरिष्ठ नेताओं द्वारा आपसी सहमति बनाने के निर्देशों के बावजूद अब तक इस सूची को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। अब देखना होगा कि विवादित नियुक्तियों पर सरकार और संगठन क्या रुख अपनाते हैं और क्या किसी स्तर पर सूची में संशोधन किया जाता है।

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