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Korba: बाइक पर निकले माइनिंग इंस्पेक्टर, रेत माफिया ने पहले ही पढ़ लिया ऑपरेशन का नक्शा! न टीपर मिला, न ट्रैक्टर

कोरबा। Korba Sand Mafia Mining Department Action जिले में अवैध रेत खनन और परिवहन के खिलाफ खनिज विभाग की कार्रवाई इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्तियों में जहां जेसीबी, टीपर और ट्रैक्टरों की जब्ती के बड़े-बड़े आंकड़े सामने आ रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और कहानी बयां कर रही है।
शनिवार को खनिज विभाग के कुछ अधिकारी और माइनिंग इंस्पेक्टर कथित तौर पर बाइक पर सवार होकर अवैध रेत परिवहन पकड़ने निकले। उद्देश्य था रेत तस्करों को रंगे हाथों पकड़ना, लेकिन अभियान ऐसा रहा कि न कोई टीपर हाथ लगा और न ही कोई ट्रैक्टर। अधिकारी घंटों क्षेत्र में घूमते रहे और आखिरकार खाली हाथ लौटना पड़ा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग की हर गतिविधि की सूचना रेत कारोबारियों तक पहले ही पहुंच जाती है। यही वजह है कि जैसे ही जांच अभियान की भनक लगती है, रेत से भरे वाहन रास्ते बदल लेते हैं या सुरक्षित ठिकानों में पहुंच जाते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर विभाग की रणनीति में सेंध कहां से लग रही है?
दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन अधिकारियों की बाइक ब्रिगेड रेत पकड़ने में नाकाम रही, उसी दिन विभाग की ओर से जारी प्रेस नोट में 1 जेसीबी, 1 ट्रेलर, 2 टीपर और 5 ट्रैक्टर समेत कुल 9 वाहनों की जब्ती का दावा किया गया। इससे यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि विभाग की कार्रवाई का असली चेहरा कौन सा है, प्रेस नोट वाला या फिर मैदान में नजर आने वाला।

खनिज विभाग के अभियान को लेकर अब लोगों के बीच तंज भी सुनाई देने लगे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि रेत माफिया और विभाग के बीच मानो “लुका-छिपी प्रतियोगिता” चल रही है, जिसमें हर बार तस्कर ही बाजी मारते दिखाई देते हैं।

जिले में करोड़ों रुपये के अवैध रेत कारोबार के बीच यह सवाल लगातार बना हुआ है कि यदि विभाग की कार्रवाई इतनी प्रभावी है तो फिर रात-दिन सड़कों पर दौड़ते अवैध रेत वाहनों का सिलसिला आखिर थम क्यों नहीं रहा?

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