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Korba Breaking: कैलाश विहार में बन रहा राखड़ डैम जैसा पहाड़! राख के साथ निकल रहा कबाड़, अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल

कोरबा।HTPP Kailash Vihar Ash Dumping दर्री स्थित एचटीपीपी (हसदेव ताप विद्युत गृह) की कैलाश विहार कॉलोनी इन दिनों राख डंपिंग को लेकर चर्चा में है। कॉलोनी की खाली जमीन पर बड़ी मात्रा में राख और मिट्टी डाली जा रही है, जिससे वहां धीरे-धीरे राखड़ डैम जैसा विशाल टीला आकार लेने लगा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा काम अधिकारियों की जानकारी और संरक्षण में किया जा रहा है, जबकि इससे कॉलोनी का वातावरण और रहवासियों का जीवन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

कॉलोनी में डंप हो रही राख, प्रबंधन की साख पर सवाल

जानकारी के अनुसार, पुराने प्लांट क्षेत्र से निकलने वाली राख और मिट्टी को ट्रकों के माध्यम से कैलाश विहार कॉलोनी के भीतर खाली पड़ी जमीन पर डंप किया जा रहा है। लगातार हो रही डंपिंग के कारण क्षेत्र में राख का पहाड़ जैसा ढेर बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले दिनों में यह स्थान स्थायी राख डंपिंग यार्ड में तब्दील हो सकता है।

 

राख उड़ने से प्रदूषण बढ़ने और बारिश के दौरान इसके बहकर आसपास के क्षेत्रों में फैलने की भी आशंका जताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आवासीय क्षेत्र के भीतर इस तरह की डंपिंग किस आधार पर की जा रही है और इसकी निगरानी कौन कर रहा है।

राख के साथ बाहर आ रहा लोहा, कबाड़ कारोबार पर भी नजर

मामले का दूसरा और अधिक गंभीर पहलू राख के साथ निकलने वाले लोहे और स्क्रैप से जुड़ा हुआ है। सूत्रों का दावा है कि पुराने प्लांट से हटाए जा रहे ढांचों और उपकरणों का लोहा राख और मलबे के साथ बाहर लाया जा रहा है। बाद में इसी राख से स्क्रैप अलग कर बेचने का खेल चल रहा है।

कॉलोनी क्षेत्र में कई लोगों को राख के ढेर से लोहा और अन्य धातु सामग्री चुनते हुए देखा गया है। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर यह गतिविधि किसकी अनुमति से संचालित हो रही है और इस कबाड़ कारोबार से किसे लाभ पहुंच रहा है।

अनुमति की जरूरत नहीं” : चीफ इंजीनियर

मामले में जब सीएसईबी के चीफ इंजीनियर हेमंत सिंह से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि पुराने प्लांट से निकलने वाली मिट्टी और राख को कॉलोनी क्षेत्र में डाला जा रहा है। उनके अनुसार यह विभागीय कार्य है और इसके लिए किसी अलग अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी आवासीय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर राख डंपिंग की जा रही है तो उसके पर्यावरणीय प्रभावों और सुरक्षा मानकों का पालन किया जाना आवश्यक है।

बड़ा सवाल

कैलाश विहार कॉलोनी को राख डंपिंग स्थल क्यों बनाया गया?

राख के ढेर से स्क्रैप चुनने वालों को किसकी अनुमति मिली है?

राख के साथ बाहर आ रहे लोहे और कबाड़ का हिसाब कौन रख रहा है?

क्या इस पूरी प्रक्रिया की कोई स्वतंत्र निगरानी हो रही है?

इन सवालों के जवाब अब स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ पर्यावरण और प्रशासनिक एजेंसियां भी तलाश रही हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल अव्यवस्थित राख डंपिंग का नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति और स्क्रैप प्रबंधन में गंभीर अनियमितताओं का भी हो सकता है।

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