
प्रतीकात्मक तस्वीर
कोरबा। जिले में बन रहे Chhattisgarh State Power Generation Company Limited (CSPGCL) के नए थर्मल पावर प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि निर्माण कार्य में घटिया क्वालिटी की गिट्टी और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर कई बार शिकायतें होने के बावजूद प्रबंधन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही।
क्या है मामला
खबरीलाल की माने तो पावर प्लांट के सिविल स्ट्रक्चर में उपयोग की जा रही गिट्टी तय मानकों के अनुरूप नहीं है। टेक्निकल टीम ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि सामग्री की गुणवत्ता को लेकर अंदरूनी स्तर पर भी आपत्तियां दर्ज की जा चुकी है, लेकिन काम नहीं रोका गया। जानकारों का कहना है कि करोड़ों रुपये की इस परियोजना की मजबूती और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे है।
जिम्मेदारी किसकी
परियोजना में मुख्य इंजीनियरिंग और निर्माण कार्य का ठेका Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) को दिया गया है। ऐसे में गुणवत्ता नियंत्रण की जवाबदेही किस स्तर पर तय होगी, यह बड़ा सवाल है।निर्माण कार्य में गुणवत्ता जांच, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन और साइट सुपरविजन की प्रक्रिया क्या पारदर्शी है, इसे लेकर भी चर्चा तेज है।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
आसपास के ग्रामीणों और कुछ जनप्रतिनिधियों का कहना है कि अगर शुरुआती चरण में ही सामग्री की गुणवत्ता पर समझौता हो रहा है तो आगे चलकर संरचना की स्थायित्व और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। लोगों ने स्वतंत्र जांच की मांग की है।
प्रबंधन की चुप्पी
अब तक प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लिखित शिकायतें देने के बाद भी जांच की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए। यह परियोजना राज्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। अगर आरोप निराधार हैं तो प्रबंधन को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, और अगर गड़बड़ी है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय होनी चाहिए।



