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Korba: एक नाम, दो शहर और टूटी राजनीतिक उम्मीदें.. बंटे हुए लड्डू वापस डिब्बे में.. एक फूल 2 माली की कहानी में ट्वीस्ट

कोरबा। राजनीति में कब क्या मोड़ आ जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। कोरबा भाजपा से जुड़ा ताजा मामला भी कुछ ऐसा ही है, जिसने खुशियों को पल भर में मायूसी में बदल दिया।

पार्टी हाईकमान की ओर से नरेंद्र देवांगन को भाजपा प्रदेश बुनकर प्रकोष्ठ का प्रदेश सहसंयोजक बनाए जाने की खबर सामने आते ही कोरबा में उनके घर जश्न का माहौल बन गया। समर्थकों ने बधाइयों का सिलसिला शुरू कर दिया और मिठाइयां बांटी जाने लगीं। माना जा रहा था कि पार्टी ने युवा चेहरे पर भरोसा जताते हुए अहम जिम्मेदारी सौंपी है।

लेकिन यह खुशी ज्यादा देर टिक नहीं पाई। कुछ ही समय बाद यह स्पष्ट हुआ कि जिस नियुक्ति आदेश की चर्चा हो रही थी, वह रायपुर क्षेत्र के नरेंद्र देवांगन के नाम जारी हुआ है, न कि कोरबा के। इस जानकारी के सामने आते ही जश्न का माहौल अचानक सन्नाटे में बदल गया।

घटना के बाद कोरबा भाजपा के भीतर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। एक ओर जहां मंत्री के करीबी और समर्थक खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं, वहीं विरोधी खेमा इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संतोष और खुशी जताता नजर आ रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे संगठनात्मक तालमेल की कमी और जल्दबाजी में फैली गलतफहमी के तौर पर देखा जा रहा है।

फिलहाल यह मामला कोरबा की सियासत में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक ही नाम ने खुशियां भी दीं और मायूसी भी।

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