Education Dept Viral Letter : वर्तनी-व्याकरण की गलतियों से भरा सरकारी पत्र वायरल…! शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल…यहां देखें वह पत्र

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Education Dept Viral Letter

औरंगाबाद, 16 दिसंबर। Education Dept Viral Letter : बिहार के शिक्षा विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। औरंगाबाद जिले से जारी शिक्षा विभाग का एक सरकारी पत्र दर्जनों वर्तनी और व्याकरण की गलतियों के कारण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। मामला सामने आने के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) को शोकॉज नोटिस जारी किया है और अगले आदेश तक उनका वेतन रोक दिया गया है।

जानकारी के अनुसार, औरंगाबाद के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कृष्णकांत पंडित द्वारा 12 दिसंबर को एक पन्ने का 10 सूत्रीय कार्यालय आदेश जारी किया गया था। यह आदेश उनके क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों के संचालन और निरीक्षण से संबंधित था। पत्र में 8 दिसंबर को हुई समीक्षा बैठक का हवाला दिया गया था, जिसमें जिला शिक्षा पदाधिकारी के निर्देशों के आधार पर आदेश जारी किया गया।

आश्चर्यजनक व्याकरण संबंधी त्रुटियां

हालांकि, इस पत्र में एक दर्जन से अधिक वर्तनी और व्याकरण संबंधी गंभीर त्रुटियां पाई गईं, जिसके बाद यह दस्तावेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पत्र में ‘समय’ को ‘समस’, ‘निरीक्षण’ को ‘निरीक्षन’, ‘अंकुश’ को ‘अंकुस’, ‘सूचना’ को ‘सुचना’, ‘विपरीत’ को ‘विपरित’, ‘व्यवस्था’ को ‘व्यवस्थ’ और ‘गुणवत्ता’ को ‘गुनवता’ जैसे शब्द लिखे गए थे।

शिक्षा विभाग की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में इस तरह की गलतियों ने लोगों को हैरान कर दिया है। शिक्षक, अभिभावक और आम नागरिक सोशल मीडिया पर पत्र को साझा कर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब शिक्षा विभाग ही शुद्ध भाषा नहीं लिख पा रहा, तो बच्चों को सही शिक्षा कैसे दी जाएगी।

मामले को लेकर यह भी चर्चा है कि या तो अधिकारी ने बिना पढ़े ही पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए या फिर पत्र तैयार करने वाले कर्मचारी को भाषा का समुचित ज्ञान नहीं था। हालांकि, चूंकि आदेश पर बीईओ के हस्ताक्षर हैं, इसलिए प्रशासनिक जिम्मेदारी उन्हीं पर तय की गई है।

इस संबंध में औरंगाबाद के जिला शिक्षा पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि वायरल पत्र उनके संज्ञान में आया है और इसमें की गई गलतियां गंभीर लापरवाही को दर्शाती हैं। बीईओ से कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है और फिलहाल उनका वेतन रोक दिया गया है। शोकॉज का जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

यह मामला एक बार फिर बिहार शिक्षा विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाता नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पर इसे सिस्टम की कमजोरी और प्रशासनिक उदासीनता से जोड़कर देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें बीईओ के जवाब और विभाग द्वारा की जाने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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