Teachers Strike : हड़ताल की आड़ में सैर-सपाटा…! फॉर्म भरकर गायब हुए कर्मचारी…पर्यटन स्थलों पर दिखे शिक्षक…धरना स्थल सूना…स्कूलों में भी लगे ताले

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Teachers' Strike

रायपुर, 31 दिसंबर। Teachers Strike : वेतन विसंगतियों को दूर करने सहित 11 सूत्रीय मांगों को लेकर शासकीय सेवकों द्वारा घोषित तीन दिवसीय हड़ताल अब सवालों के घेरे में आ गई है। सोमवार 29 दिसंबर से 31 दिसंबर तक घोषित हड़ताल के पहले ही दिन से यह साफ नजर आने लगा है कि बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी धरना स्थल पर उपस्थिति देने की बजाय हड़ताल को अवकाश के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

कलेक्ट्रेट सहित अधिकांश शासकीय कार्यालयों में ताले लटके रहे, वहीं स्कूलों में भी शिक्षक नदारद दिखे। खास बात यह है कि कई विद्यालयों में परीक्षा सिर पर होने और पाठ्यक्रम पूरा करने का दबाव होने के बावजूद नियमित शिक्षक हड़ताल पर चले गए हैं। धरना स्थल पर जहां मांगों को लेकर आंदोलन होना था, वहां गिनती के ही अधिकारी-कर्मचारी नजर आए।

11 सूत्रीय मांगों की हड़ताल

सूत्रों के अनुसार, तय फॉर्मेट में 11-सूत्री मांगों के साथ हड़ताल का नोटिस देने के बाद, कई कर्मचारी न तो विरोध स्थल पर आए और न ही ऑफिस में। इस अवधि को उन्होंने निजी भ्रमण और पारिवारिक पर्यटन के लिए इस्तेमाल किया। कुछ शिक्षक तो स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा घोषित शीतकालीन अवकाश के बाद 29 दिसंबर को स्कूल खुलने की बजाय सीधे हड़ताल का सहारा लेकर अतिरिक्त अवकाश का लाभ उठाते नजर आए।

बताया जा रहा है कि बिना किसी पूर्व अनुमति या विभागीय सूचना के कई कर्मचारी और शिक्षक कुल्लू-मनाली, दिल्ली, ऋषिकेश, प्रयागराज, केरल, बालाजी मंदिर, गोवा, नेपाल जैसे पर्यटन स्थलों की ओर रवाना हो गए। आमतौर पर सरकार के सामने अपनी मांगों को मजबूती से रखने वाले कर्मचारी इस बार हड़ताल को आंदोलन से ज्यादा ‘एक्स्ट्रा हॉलीडे’ के रूप में भुनाते दिख रहे हैं।

शासकीय कार्यालयों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही। धरना स्थल पर कुछ बड़े पदाधिकारी ही मौजूद रहे, जबकि अधिकांश कर्मचारियों के बारे में यह तक पता नहीं चल सका कि वे कहां हैं और क्या कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, यह हड़ताल सरकार से मांगें मनवाने के बजाय हड़ताल की आड़ में सैर-सपाटे और निजी लाभ का माध्यम बनती नजर आ रही है, जिससे आंदोलन की गंभीरता और उद्देश्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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