कोरबा
Poison Infused in Hasdeo : हसदेव में घुला सफेद जहर…! HTPS पर ₹20.34 करोड़ का जुर्माना…डेढ़ महीने में दूसरी बड़ी चूक
राखड़ डैम फूटने से नदी, बैराज और शहर की जलापूर्ति प्रभावित

राख के सैलाब में डूबा बैराज, किसानों ने जताई आपत्ति
19 अप्रैल को डैम टूटने के बाद राख मिश्रित पानी तेजी से हसदेव दर्री बैराज तक पहुंच गया। इसे खाली करने के लिए 20 अप्रैल से बैराज के गेट खोलकर लगातार पानी छोड़ा गया। इसी दौरान नहरों के माध्यम से खेतों में सिंचाई के लिए भी पानी भेजा जा रहा था। प्रदूषित और राखयुक्त पानी फसलों तक पहुंचने से जांजगीर-चांपा जिले के किसानों ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बैराज का पानी अत्यधिक प्रदूषित हो चुका था, जिससे जल संरक्षण और पेयजल आपूर्ति दोनों पर गहरा संकट मंडराने लगा था।जांच में सामने आई “घोर लापरवाही”
मार्च में हुई पहली घटना के बाद कलेक्टर कुणाल दुदावत ने अपर कलेक्टर ओंकार यादव के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित की थी। इस जांच रिपोर्ट में विद्युत उत्पादन कंपनी की “घोर लापरवाही” उजागर हुई थी। इसके बावजूद सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था में कोई सुधार नहीं किया गया, जिसका खामियाजा इस दूसरी बड़ी दुर्घटना के रूप में भुगतना पड़ा। नगर निगम ने भी बैराज और नदी में बढ़ते प्रदूषण पर गंभीर चिंता जताई है, क्योंकि शहर की अधिकांश पेयजल आपूर्ति इसी स्रोत से होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आगामी मानसून (बारिश के मौसम) से पहले इसे नहीं सुधारा गया, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।67 वार्डों की जलापूर्ति ठप, पानी में 28% तक घुली राख
कोरबा नगर निगम के 67 वार्डों में नहर और सर्वेश्वर एनीकट से पानी लेकर सप्लाई की जाती है। पानी में राख की मात्रा अत्यधिक होने के कारण कोहड़िया वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में शुद्धिकरण (Purification) की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई। जांच में पाया गया कि पानी में लगभग 28 प्रतिशत तक राख घुल चुकी थी, जिसके कारण पानी को साफ करने में सामान्य से कहीं अधिक समय लगा। इसका सीधा असर शहर की सप्लाई पर पड़ा और जो जलापूर्ति सुबह 7 बजे होनी थी, वह दोपहर 11 बजे तक खिसक गई। लगभग पांच दिनों तक शहरवासियों को इस संकट और अनियमित जलापूर्ति से जूझना पड़ा।
210 मेगावाट बिजली उत्पादन ठप
राखड़ डैम फूटने के बाद सुरक्षा के लिहाज से HTPS की यूनिट-3 और यूनिट-4 को बंद करना पड़ा है। इन दोनों यूनिट्स के बंद होने से कुल 210 मेगावाट का बिजली उत्पादन ठप हो गया है। घटना के 23 दिन बीत जाने के बाद भी उत्पादन दोबारा शुरू नहीं हो सका है, जिससे कंपनी को रोजाना करोड़ों रुपए का अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। HTPS संयंत्र (पश्चिम) के मुख्य अभियंता एच.के. सिंह ने बताया, “राखड़ डैम की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन इसे पूरी तरह ठीक होने में अभी कुछ समय और लगेगा।”अधिकारी निलंबित, लेकिन ठेका कंपनी पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
इस बड़ी चूक के बाद उत्पादन कंपनी ने आनन-फानन में अधीक्षण अभियंता को हटाकर रायपुर से सत्येंद्र कुमार साहू को नई जिम्मेदारी सौंपी है। साथ ही, सहायक अभियंता (सिविल) और कार्यपालन अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस ठेका कंपनी पर डैम के रखरखाव और मजबूती का जिम्मा था, उस पर प्रशासन ने अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की है?






