प्रतीकात्मक तस्वीर
रायपुर NPZ 5 फरवरी । हाईकोर्ट द्वारा 67 सब इंजीनियरों की नौकरी रद्द किए जाने के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कुछ रसूखदार अधिकारी भारी दबाव में आ गए हैं। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि बिना डिग्री भर्ती के इस मामले में अब फाइलें संभालने और जिम्मेदारी इधर-उधर करने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
सूत्रों की मानें तो मामला यहीं थमने वाला नहीं है। उल्टे, यह तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े बड़े नाम भी घेरे में आ सकते हैं।
प्रकरण लंबित था, फिर भी प्रमोशन मिलता रहा
कहावत है, “शैय्या भय कोतवाल तो डर काहे का” और यही स्थिति इस पूरे मामले में देखने को मिली।
जब बिना डिग्री के भर्ती का मामला हाईकोर्ट में लंबित था, उसी दौरान विवादित सब इंजीनियरों को एसडीओ (उप अभियंता) जैसे अहम पदों पर प्रमोशन दिया जाता रहा।यह सवाल अब जोर पकड़ रहा है कि जब मामला न्यायालय में था, तब किसके संरक्षण में ये पदोन्नतियां होती रहीं।
सिविल लाइन थाने तक पहुंच चुका है मामला
इन 67 सब इंजीनियरों की भर्ती वर्ष 2012–13 की है। शुरुआत से ही आरोप रहे कि नियमों को ताक पर रखकर बिना आवश्यक डिग्री के नियुक्तियां की गईं।
मामले की शिकायत रायपुर के सिविल लाइन थाने में दर्ज है। वर्ष 2017 में तत्कालीन सरकार ने जांच के बाद इन्हें सेवा से हटाने का फैसला भी किया था, लेकिन सरकारें बदलीं और कार्रवाई फाइलों में दबती चली गई।अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी अपात्र इंजीनियरों की नियुक्ति को रद्द कर दिया है।



