रायपुर। छत्तीसगढ़ की सत्ता में बड़ी हलचल की खबरें तेजी से तैर रही हैं। अंदरखाने से आ रही चर्चाओं ने कई मंत्रियों की नींद उड़ा दी है। संकेत मिल रहे हैं कि मई महीने में मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के मंत्रिमंडल में बड़ी सर्जरी हो सकती है।
सत्ता और संगठन के गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री को छोड़कर बाकी सभी 12 मंत्रियों से इस्तीफा लिया जा सकता है। इसके बाद नई रणनीति के साथ मंत्रिपरिषद का पुनर्गठन किया जाएगा, ताकि सरकार को नई ऊर्जा और नई टीम के साथ आगे बढ़ाया जा सके।
ढाई साल का ‘इंटरवल’, अब असली परीक्षा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मई का समय बेहद अहम है। तब तक सरकार का कार्यकाल लगभग ढाई साल का हो जाएगा, जिसे सत्ता का इंटरवल माना जाता है।
दरअसल 2028 के विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मी 2027 के आखिर से ही तेज होने लगेगी। ऐसे में सरकार के पास काम दिखाने के लिए करीब डेढ़ साल का ही वक्त बचेगा। भाजपा नेतृत्व किसी भी कीमत पर 2018 जैसी हार की पुनरावृत्ति नहीं चाहता।
4 से 5 मंत्रियों की छुट्टी लगभग तय!
सूत्रों की मानें तो मौजूदा मंत्रिमंडल के 4 से 5 मंत्रियों की छुट्टी लगभग तय मानी जा रही है। संगठन की नजर खासतौर पर उन विभागों पर है जहां कामकाज की रफ्तार धीमी है या जनता के बीच अपेक्षित प्रभाव नहीं बन पाया।
बताया जा रहा है कि कुछ ऐसे मंत्री भी निशाने पर हैं जो कुछ महीने पहले भी सवालों के घेरे में आए थे, लेकिन उस वक्त बदलाव टल गया था।
‘दिल्ली फैक्टर’ और नितिन नबीन की सक्रियता
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि इस संभावित फेरबदल के पीछे भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की सक्रिय भूमिका है।
खासकर छत्तीसगढ़ भाजपा के सह-प्रभारी और राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से उभरते नेता Nitin Nabin को इस रणनीति का अहम किरदार माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि पार्टी के कैडर और जमीनी कार्यकर्ताओं से उनके सीधे संवाद के कारण हर मंत्री के प्रदर्शन की विस्तृत रिपोर्ट उनके पास है।
जुलाई सत्र कई मंत्रियों के लिए आखिरी?
अगर मई में यह सर्जरी सच में होती है, तो जुलाई में होने वाला मानसून सत्र कई मौजूदा मंत्रियों के लिए विधानसभा के भीतर आखिरी सत्र साबित हो सकता है।
भाजपा की इस संभावित कवायद का मकसद सिर्फ चेहरे बदलना नहीं, बल्कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले एक मजबूत, सक्रिय और चुनावी टीम तैयार करना बताया जा रहा है। फिलहाल सब कुछ अटकलों के दायरे में है, लेकिन सत्ता के गलियारों में उठी इस हलचल ने कई मंत्रियों की धड़कनें जरूर बढ़ा दी हैं।
अगर यह फैसला हुआ, तो छत्तीसगढ़ की राजनीति में मई महीना बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकता है।



