रायपुर, 27 दिसंबर। Religious Transparency : धर्म, आस्था और सादगी के नाम पर उपदेश देने वाले धार्मिक कथावाचकों की जीवनशैली एक बार फिर बहस का विषय बन गई है। कथावाचक धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के बयान के बाद, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए यह सवाल उठाया कि क्या आज धार्मिक प्रवचन केवल आध्यात्मिक सेवा है या धन और प्रभाव हासिल करने का माध्यम बन गया है।
पवन दीवान का उदाहरण
भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कथावाचक पवन दीवान का उदाहरण देते हुए कहा कि आज भी कई कथावाचक कठिनाई से अपना आश्रम चला रहे हैं, भगवत भजन कर रहे हैं और भक्ति-ज्ञान का प्रचार कर रहे हैं। पवन दीवान मंत्री, सांसद और विधायक भी रहे, उन्होंने पूरी जिंदगी कथावाचन किया, लेकिन उनके आश्रम की हालत आज भी खस्ता है।
इसके विपरीत, कुछ कथावाचक जैसे धीरेन्द्र शास्त्री और प्रदीप मिश्रा, सरकारी जहाजों में घूम रहे हैं, बड़े-बड़े अस्पताल और मेडिकल कॉलेज खोल रहे हैं और करोड़ों-अरबों रुपये के मालिक बन गए हैं। बघेल ने सवाल उठाया कि अगर उनके झाड़-फूंक और दिव्य दरबार से ही लोग ठीक हो रहे हैं, तो फिर अस्पताल और मेडिकल कॉलेज खोलने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
बहरहाल, पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। समर्थक और आलोचक दोनों ही कथावाचकों की भूमिका, धार्मिक मंचों की मर्यादा और सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता पर बहस कर रहे हैं।



