इसी अभियान के बीच PCC अध्यक्ष दीपक बैज ने संकेत दिया है कि कांग्रेस के आंदोलन में शामिल होने राहुल गांधी बस्तर पहुंच सकते हैं। हालांकि, राहुल गांधी के दौरे की तारीख और विस्तृत कार्यक्रम को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
बस्तर में राहुल गांधी के दौरे का क्या है प्लान?
कांग्रेस की रणनीति राहुल गांधी के संभावित बस्तर दौरे को केवल एक बड़ी राजनीतिक सभा तक सीमित रखने की नहीं बताई जा रही है। पार्टी की कोशिश आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और प्रभावित परिवारों के साथ संवाद का कार्यक्रम तैयार करने की है।
इसके जरिए स्थानीय स्तर पर उठ रहे मुद्दों को राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने रखने और उन्हें व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाने की कोशिश होगी।
जल-जंगल-जमीन बनेगा कांग्रेस का मुख्य मुद्दा
बस्तर में कांग्रेस का प्रस्तावित अभियान जल-जंगल-जमीन के पारंपरिक राजनीतिक मुद्दे के इर्द-गिर्द केंद्रित रहने की संभावना है।
पार्टी आदिवासी समुदाय से जुड़े कई विषयों को एक साथ उठाने की तैयारी में है। इनमें वनाधिकार पट्टे, जमीन से जुड़े विवाद, विस्थापन और पुनर्वास, स्थानीय रोजगार, लघु वनोपज, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाएं प्रमुख हो सकते हैं।
कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति बना रही है।
आदिवासी मुद्दों पर तैयार होगी रिपोर्ट
कांग्रेस बस्तर संभाग के अलग-अलग इलाकों में जाकर जमीनी स्थिति की जानकारी जुटाने पर भी फोकस कर रही है। इसके लिए विशेष समिति या संगठनात्मक स्तर पर टीम के जरिए स्थानीय समस्याओं और मांगों का फीडबैक जुटाया जा सकता है।
इस रिपोर्ट में वनाधिकार, भूमि विवाद, विस्थापन, पुनर्वास, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जुड़े मुद्दों को शामिल किए जाने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक, ऐसी रिपोर्ट को राहुल गांधी के संभावित बस्तर कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने रखा जा सकता है।
नक्सलवाद के बाद बदल रहा बस्तर का सियासी नैरेटिव?
बस्तर की राजनीति में लंबे समय तक नक्सलवाद और सुरक्षा सबसे प्रमुख मुद्दे रहे हैं। सुरक्षा बलों की कार्रवाई और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक पहुंच बढ़ने के साथ राजनीतिक दल अब स्थानीय जनता से जुड़े दूसरे सवालों को भी ज्यादा प्रमुखता देने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस इसी बदलते राजनीतिक माहौल में आदिवासी अधिकार और विकास को केंद्र में लाने की कोशिश कर रही है।
पार्टी के लिए चुनौती यह भी है कि सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की जमीन, रोजगार, वनाधिकार और विकास से जुड़ी अपेक्षाओं को किस तरह राजनीतिक एजेंडे में प्रभावी ढंग से रखा जाए।
खदान आवंटन और UCC पर भी कांग्रेस का फोकस
कांग्रेस जल-जंगल-जमीन के मुद्दे के साथ खदान आवंटन, वनाधिकार और आदिवासी हितों से जुड़े सवालों को भी उठाने की तैयारी में है।
इसके अलावा समान नागरिक संहिता यानी UCC जैसे राष्ट्रीय मुद्दों को भी आदिवासी हितों के नजरिए से राजनीतिक बहस में शामिल किए जाने के संकेत हैं।
इस रणनीति के जरिए कांग्रेस केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों को आदिवासी अधिकारों के मुद्दे पर घेरने की कोशिश कर सकती है।
2028 विधानसभा चुनाव से पहले क्यों अहम है बस्तर?
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2028 में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने जमीनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। बस्तर कांग्रेस के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
ऐसे में राहुल गांधी का संभावित दौरा पार्टी के लिए संगठन को सक्रिय करने, स्थानीय कार्यकर्ताओं में ऊर्जा बढ़ाने और आदिवासी क्षेत्रों में राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का अवसर हो सकता है।
कांग्रेस अगर जल-जंगल-जमीन के मुद्दे को स्थानीय स्तर पर मजबूत अभियान में बदलने में सफल रहती है, तो आने वाले समय में बस्तर की राजनीति में इसका असर दिखाई दे सकता है।
क्या बस्तर में बदलेगा चुनावी मुद्दा?
नक्सलवाद के प्रभाव में बदलाव के बाद बस्तर में राजनीतिक दलों के सामने अब सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय अधिकार, विकास, रोजगार, वनाधिकार और खनन जैसे सवालों पर स्पष्ट रणनीति बनाने की चुनौती है।
कांग्रेस राहुल गांधी के संभावित दौरे को इसी बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच एक बड़े अभियान की शुरुआत के तौर पर इस्तेमाल करना चाहती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि राहुल गांधी का बस्तर दौरा कब तय होता है और कांग्रेस का जल-जंगल-जमीन अभियान जमीन पर कितना असर छोड़ पाता है।












