Featuredदेशराजनीति

सोशल इंजीनियरिंग से वोट मैनेजमेंट तक: नीतीश कुमार ने सेट किया बिहार का सियासी समीकरण

पटना। बिहार में चुनावी बिसात बिछ चुकी है और सियासी तापमान चरम पर है। तमाम राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों को धार दे रहे हैं, लेकिन इस सियासी शोर में अगर कोई चुपचाप मगर सधे हुए कदमों से आगे बढ़ रहा है, तो वह हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। भले ही उनकी सक्रियता को लेकर विरोधी भ्रम में हों, लेकिन जानकार मानते हैं कि नीतीश कुमार इस बार भी अपने ‘मास्टर स्ट्रोक’ के दम पर चुनावी समीकरण साधने में लगे हैं।

1. मुफ्त बिजली: गरीब और ग्रामीण वोट बैंक पर सीधा फोकस

नीतीश कुमार की सबसे चर्चित और राजनीतिक रूप से असरदार घोषणा रही है – 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली। इस कदम से 1 करोड़ 86 लाख घरेलू उपभोक्ता सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। ग्रामीण और निम्न-मध्यम वर्ग में इसकी व्यापक सराहना हो रही है। सर्वे में 63% लोगों ने माना कि यह योजना चुनावी जीत का रास्ता बना सकती है।

यह फैसला बिहार की 90% आबादी को राहत देता है। सीधा असर वोटरों की जेब पर और मन पर पड़ रहा है।” – एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक

 

2. सामाजिक सुरक्षा पेंशन: संवेदनशील मुख्यमंत्री की छवि मजबूत

पिछले दो महीनों में नीतीश कुमार ने सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा दांव चला। पेंशन राशि को ₹400 से बढ़ाकर ₹1100 कर दिया गया। इससे 1 करोड़ 12 लाख लाभार्थी, जिनमें बुजुर्ग, विधवा महिलाएं और दिव्यांगजन शामिल हैं, सीधे लाभ में आए। ये वही वर्ग है जो वोटिंग में सबसे अधिक सक्रिय और निर्णायक होता है।

3. युवाओं के लिए नौकरी और रोजगार का संकल्प

नीतीश सरकार अब तक 10 लाख सरकारी नौकरी और 39 लाख रोजगार उपलब्ध करा चुकी है। चुनावी माहौल को देखते हुए इस लक्ष्य को बढ़ाकर 12 लाख नौकरी और 50 लाख रोजगार करने की घोषणा हुई है। इसके साथ ही नीतीश कुमार ने अगला बड़ा वादा किया है – अगले 5 वर्षों में 1 करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य।

नीतीश कुमार के इस ऐलान ने उन परिवारों को भी उम्मीद दी है जो वर्षों से नौकरी की तैयारी कर रहे थे।”  युवा वर्ग के बीच प्रतिक्रिया

 

4. सर्वे में बढ़त: नीतीश फिर पहली पसंद

हाल ही में आए सी-वोटर सर्वे के अनुसार, बिहार की 65% जनता ने नीतीश कुमार को फिर से मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहली पसंद बताया है। सर्वे बताता है कि:

  • मुफ्त बिजली योजना ने ग्रामीण और गरीब वर्ग को जोड़ा
  • पेंशन बढ़ोतरी से बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग प्रभावित हुए
  • युवाओं को रोजगार के वादों ने उन्हें नीतीश के पाले में लाया
  • मानदेय व पेंशन बढ़ोतरी से सरकारी और सामाजिक कार्यकर्ता वर्ग संतुष्ट हुआ

चुपचाप चल रहा ‘नीतीश मॉडल’

नीतीश कुमार की राजनीति की खासियत रही है – शोर नहीं, असरदार फैसले। इस बार भी उन्होंने सोशल इंजीनियरिंग और वोट बैंक मैनेजमेंट के जरिए वो सियासी समीकरण तैयार किया है, जो विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। जानकारों का मानना है कि नीतीश का ये ‘सॉफ्ट लेकिन सॉलिड’ चुनावी अभियान 2025 के विधानसभा चुनाव में गेम चेंजर साबित हो सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button