छत्तीसगढ़

Naxal Free Bastar : नक्सल गढ़ बीजापुर में साहस की मिसाल…! डर के बीच ड्यूटी निभाने का जज्बा…एक IPS ने संभाली कमान

एक निर्णय जिसने बदल दी बीजापुर की तस्वीर

बीजापुर, 01 मार्च। Naxal Free Bastar : छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग 31 मार्च को नक्सल मुक्त होने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर चुका है। इस सफर के पीछे सुरक्षा बलों के साहस, सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति और कई जांबाज अफसरों की निर्णायक भूमिका रही। इन्हीं में एक नाम है रतनलाल डांगी, जिन्होंने बेहद कठिन हालात में बीजापुर की कमान संभालकर नक्सल विरोधी अभियान को नई दिशा दी।

जब पद था, लेकिन जिम्मेदारी लेने वाला नहीं

साल 2006 में बीजापुर देश के सबसे संवेदनशील नक्सल प्रभावित जिलों में गिना जाता था। हालात इतने खराब थे कि एक अधिकारी ने एसपी पद ज्वाइन करने से इनकार कर दिया, जबकि दूसरे को ज्वाइन न करने पर निलंबन झेलना पड़ा।

इसी दौरान मई 2006 में, जब डांगी कांकेर में एसडीओपी थे, उनका तबादला बीजापुर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में हुआ। परिस्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने खुद आगे बढ़कर एसपी की जिम्मेदारी लेने की पेशकश की। सरकार ने उसी दिन आदेश संशोधित कर उन्हें सीधे एसपी नियुक्त कर दिया और 4 मई 2006 को उन्होंने कार्यभार संभाल लिया।

सलवा जुडूम का दौर और सीमित संसाधन

यह वह समय था जब सलवा जुडूम अपने चरम पर था। जिले में महज दो बटालियन के सहारे सुरक्षा व्यवस्था चल रही थी। कई जगहों पर नियमित पुलिस अधिकारियों के बजाय सहायक बलों को जिम्मेदारी दी गई थी।

‘खूनी सड़क’ को बनाया सुरक्षित

बीजापुर से गंगालूर जाने वाला रास्ता “खूनी सड़क” के नाम से कुख्यात था। डांगी के नेतृत्व में बीआरओ के सहयोग से इस सड़क निर्माण को फिर शुरू कराया गया। सुरक्षा के बीच कच्ची सड़क को पक्की सड़क में बदला गया, जिससे अभियान को रणनीतिक मजबूती मिली।

नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता

कठिन परिस्थितियों के बावजूद डांगी के नेतृत्व में अभियान को बड़ी सफलता मिली, पहले वर्ष में 38 नक्सली ढेर, दूसरे वर्ष में 34 नक्सली मारे गए, उस दौर में एक नक्सली को मार गिराना भी बड़ी चुनौती माना जाता था।

दो बार मिला राष्ट्रपति वीरता पदक

नक्सल विरोधी अभियानों में उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए रतनलाल डांगी को दो बार राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया गया। वे छत्तीसगढ़ पुलिस के पहले ऐसे अधिकारी माने जाते हैं जिन्हें यह सम्मान दो बार मिला।

शानदार करियर

डांगी ने बीजापुर, कांकेर, बिलासपुर, कोरबा और बस्तर जैसे जिलों में एसपी के रूप में सेवा दी। इसके अलावा दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा और रायपुर रेंज में IG के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। बाद में उन्हें पुलिस अकादमी चंदखुरी का डायरेक्टर बनाया गया।

बीजापुर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में उस दौर में लिया गया एक साहसिक फैसला आज नक्सल मुक्त बस्तर की कहानी का अहम अध्याय बन चुका है।

 

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