
कोरबा।शिक्षा विभाग इन दिनों शिक्षा से ज़्यादा चमचों की परवरिश में लगा है। स्थिति यह कि विभाग में ज्ञान से ज्यादा गांधी के चित्र की कद्र है.. जेब में हों तो आपकी विनती भी नीति बन जाती है, और न हों तो आप बस भीड़ में गुम एक शिक्षक। राजाओं के जमाने में भाट-चाटुकार दरबार की शान बढ़ाते थे, आज वही परंपरा “अपग्रेड” होकर अफसरों के दरबार में डिजिटल रूप में ढोल-नगाड़ों की जगह मोबाइल की घंटियां बजाती हैं और हाजिरी चरणों में नहीं, “रिचार्ज” में लगती है।
सूत्र बताते हैं कि धन्ना सेठों के नगर में पदस्थ विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने इस परंपरा को नया विस्तार दे दिया है। बड़े साहब के चरणों में अटूट आस्था रखने वाले इस अधिकारी के लिए चाटुकारिता अब प्रशासनिक कौशल का हिस्सा बन चुकी है।
यूक्तियुक्तकरण के दौरान अनियमितताओं की शिकायत पर अधिकारी का तबादला दूसरे जिले कर दिया गया, लेकिन इसके बाद भी वे कुर्सी से हटने को तैयार नहीं हैं। विभाग में उन्हें “कमाऊ पुत्र” के नाम से भी पुकारा जाता है। यही कारण है कि ट्रांसफर के बावजूद वे उसी पद पर बैठे हुए हैं और अलग-अलग अफसरों को अपने स्तर पर रिचार्ज करा रहे हैं। वैसे तो बीईओ के कुर्सी के असली हकदार भी उसी दफ्तर में बैठकर डीईओ के आशीर्वाद का इंतजार कर रहे है। एक दफ्तर में दो अफसर को पदस्थ देखकर शिक्षक मुस्कुराते हुए कह रहे एक फूल के दो माली और प्रभारी साहब कर रहे हमारी जेबें खाली..!
जनचर्चा यह भी है कि साहब रिचार्ज तो औरों को करते हैं लेकिन स्वयं ही फूल चार्ज हो जाते हैं।



