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Korba : आस्था पर महंगाई की मार… प्रतिमा निर्माण सामग्रियों की कीमतों में 25 प्रतिशत का उछाल

कोरबा | न्यूज पॉवर जोन

Ganesh Durga Idol Price Hike Korba विघ्नहर्ता श्री गणेश के आगमन और मां दुर्गा के स्वागत की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। शहर के मूर्तिकार पूरे मनोयोग से प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। लेकिन इस बार आस्था के इस महापर्व पर महंगाई का साया साफ दिखाई दे रहा है। प्रतिमा निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी, पैरा, रंग, पोशाक समेत लगभग सभी आवश्यक सामग्रियों की कीमतों में बीते वर्ष की तुलना में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में इस वर्ष श्रद्धालुओं को प्रतिमा स्थापना के लिए पहले से अधिक न्यौछावरी करनी पड़ सकती है।

कोरबा के मूर्तिकार तिलकराम वर्मा बताते हैं कि फ्रेम तैयार होने के बाद अब पैरा बंधाई का काम चल रहा है। उनका कहना है कि निर्माण सामग्री लगातार महंगी होने से प्रतिमा की लागत बढ़ी है। इसका असर न्यौछावरी पर पड़ना स्वाभाविक है, लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि भगवान के प्रति श्रद्धा रखने वाले भक्त महंगाई को आस्था के आड़े नहीं आने देंगे। उनका मानना है कि भक्ति का भाव आज भी पहले जैसा ही अटूट है।

 

अब 30 से 35 रुपये किलो मिट्टी

 

प्रतिमा निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण सामग्री मिट्टी भी अब महंगी हो गई है। सामान्य गुणवत्ता वाली मिट्टी 30 रुपये प्रति किलो और उच्च गुणवत्ता वाली मिट्टी 35 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। बेहतर गुणवत्ता वाली मिट्टी में करीब 5 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। आने वाले दिनों में दीपावली के लिए दीये बनाने वाले कुम्हारों की मांग बढ़ने से कीमतों में और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।

 

पैरा में भी तेज उछाल

 

प्रतिमा निर्माण के लिए आवश्यक पैरा की कीमतों में भी अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है। पिछले वर्ष जहां एक ट्रॉली पैरा 2500 रुपये में उपलब्ध था, वहीं इस बार इसकी कीमत 3000 रुपये प्रति ट्रॉली हो गई है। बारिश के मौसम में पैरा निकालना मुश्किल होने के कारण मूर्तिकार अभी से गणेशोत्सव और नवरात्रि दोनों पर्वों के लिए एक साथ भंडारण कर रहे हैं।

 

रंग और पोशाक ने भी बढ़ाई लागत

 

प्रतिमाओं को आकर्षक स्वरूप देने के लिए इस्तेमाल होने वाले रंग और पोशाक भी महंगे हो चुके हैं। रंगों की कीमत में लगभग 7 प्रतिशत और पोशाक में 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। डीजल और परिवहन लागत बढ़ने का असर इन सामग्रियों पर भी पड़ा है। यही वजह है कि मूर्तिकार दोनों प्रमुख धार्मिक पर्वों के लिए आवश्यक सामग्री अभी से खरीद रहे हैं।

 

महंगाई ने प्रतिमा निर्माण की लागत जरूर बढ़ा दी है, लेकिन मूर्तिकारों का कहना है कि भगवान की प्रतिमा बनाना उनके लिए केवल रोजगार नहीं, बल्कि श्रद्धा और सेवा का माध्यम है। उनका विश्वास है कि महंगाई चाहे जितनी बढ़ जाए, गणपति बप्पा और मां दुर्गा के प्रति भक्तों की आस्था कभी कम नहीं होगी। इस वर्ष भी श्रद्धालु पूरे उत्साह, विश्वास और भक्ति के साथ अपने आराध्य का स्वागत करेंगे।

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