
कोरबा। Korba Illegal Sand Mining Death जिले में अवैध रेत खनन का काला कारोबार एक बार फिर किसी परिवार की खुशियां निगल गया। प्रशासन भले ही नदी-नालों से रेत उत्खनन पर पूर्ण प्रतिबंध का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि रेत माफिया बेखौफ होकर नदियों का सीना चीर रहे हैं और इसकी कीमत अब लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है।
मड़वारानी क्षेत्र की सोन नदी से अवैध रूप से रेत भरकर लौट रहा एक ट्रैक्टर ग्राम जरवे के पास अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसा इतना भयावह था कि 29 वर्षीय शिवकुमार पटेल ट्रैक्टर के इंजन के नीचे दब गया। ग्रामीणों ने उसे बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं चालक अमित कुमार सहित एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिनका उपचार जारी है।
एक मौत और कई सवाल
शिवकुमार की मौत केवल एक सड़क हादसा नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर सवाल है जो प्रतिबंध के बावजूद अवैध रेत खनन को रोक पाने में नाकाम साबित हो रही है।
जब जिले में रेत उत्खनन पर रोक लगी हुई है, तो फिर सोन नदी से ट्रैक्टरों में भरकर रेत कैसे निकाली जा रही थी? आखिर किसकी निगरानी में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है? क्या जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर सब कुछ देखकर भी अनदेखा किया जा रहा था?
प्रतिबंध का दम भरने वाले जवाब दें
खनिज विभाग, राजस्व अमला और स्थानीय प्रशासन लगातार कार्रवाई के दावे करते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि नदी घाटों पर रात-दिन रेत की तस्करी जारी है। यदि समय रहते सख्ती की जाती और अवैध उत्खनन पर प्रभावी रोक लगाई जाती, तो शायद आज शिवकुमार जिंदा होता।
एक परिवार उजड़ा, जिम्मेदार कौन?
एक युवा की मौत के बाद उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर का सहारा छिन गया, लेकिन सवाल यह है कि इस मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या यह सिर्फ एक दुर्घटना मानकर मामला बंद कर दिया जाएगा, या फिर अवैध रेत कारोबार को संरक्षण देने वालों तक भी जांच पहुंचेगी?
पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन जिले की जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर प्रतिबंधित रेत खनन के इस खेल पर लगाम कब लगेगी, ताकि किसी और घर का चिराग यूं न बुझे।






