नई दिल्ली, 11 सितंबर। India Russia Defense Deal : भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक बार फिर हलचल तेज है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने दिल्ली में हैं। पुतिन की भारत यात्रा के बीच ब्रिक्स सम्मेलन से इतर थोड़ी ही देर में दोनों देशों के बीच संभावित रक्षा सौदों को लेकर चर्चा होने वाली हैं। इनमें S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की अतिरिक्त स्क्वाड्रन और रूस के Su-57 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का प्रस्ताव प्रमुख माना जा रहा है।
इसी बीच रूस की ओर से Product 177S इंजन का प्रस्ताव भी चर्चा में है। रिपोर्टों के मुताबिक, रूस इस इंजन को न केवल Su-57 के लिए बल्कि भारतीय वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल हो रहे AL-31F/AL-31FP परिवार के इंजनों के संभावित विकल्प के तौर पर भी पेश कर रहा है। सबसे अहम बात यह है कि इसमें भारत में स्थानीय उत्पादन के लिए तकनीक हस्तांतरण की संभावना भी बताई जा रही है।
AMCA के लिए इंजन क्यों है सबसे अहम मुद्दा?
भारत का Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) प्रोजेक्ट देश के सबसे महत्वाकांक्षी स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रमों में से एक है। AMCA को पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ मल्टी-रोल फाइटर के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इसमें स्टील्थ, सुपरसोनिक प्रदर्शन, सुपरक्रूज और आधुनिक एवियोनिक्स जैसी क्षमताएं शामिल करने की योजना है।
लेकिन, इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक उपयुक्त हाई-थ्रस्ट इंजन हासिल करना है। भारत को ऐसा इंजन चाहिए जो AMCA की जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त थ्रस्ट देने के साथ-साथ विश्वसनीय, टिकाऊ और तकनीकी रूप से उन्नत हो।
क्या है रूस का Product 177S इंजन?
रूस का 177S नाम वाला इंजन इसी वजह से भारत के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। उपलब्ध दावों के अनुसार, यह रूसी हाई-थ्रस्ट इंजन परिवार की अगली पीढ़ी का विकास है और इसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।
कुछ रिपोर्टों में इसकी अधिकतम थ्रस्ट क्षमता करीब 14,500 kgf यानी लगभग 142 kN बताई गई है। यदि ये आंकड़े और प्रस्तावित कॉन्फिगरेशन वास्तविक उत्पादन संस्करण में कायम रहते हैं, तो यह AMCA के लिए आवश्यक थ्रस्ट श्रेणी से ऊपर की क्षमता दे सकता है।
177S इंजन की खूबियां
– करीब 142 kN तक अधिकतम थ्रस्ट की क्षमता।
– बेहतर ईंधन दक्षता।
– आधुनिक डिजिटल इंजन कंट्रोल सिस्टम।
– लंबी सेवा आयु का लक्ष्य।
– लड़ाकू विमान के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए हाई-थ्रस्ट डिजाइन।
– थ्रस्ट वेक्टरिंग जैसी तकनीकों के साथ इस्तेमाल की संभावना।
– भविष्य में स्टील्थ विमान के लिए अधिक उन्नत नोज़ल डिजाइन अपनाने की संभावना।
AMCA में ज्यादा थ्रस्ट का क्या फायदा होगा?
अगर AMCA के लिए 177S जैसे हाई-थ्रस्ट इंजन को सफलतापूर्वक अनुकूलित किया जाता है, तो इससे विमान के प्रदर्शन में कई फायदे मिल सकते हैं। सबसे बड़ा फायदा होगा थ्रस्ट-टू-वेट रेशियो में सुधार। ज्यादा थ्रस्ट का इस्तेमाल बेहतर त्वरण, चढ़ाई और युद्धाभ्यास क्षमता के लिए किया जा सकता है।
इसके अलावा, पर्याप्त इंजन शक्ति भविष्य में AMCA को हथियारों और ईंधन के विभिन्न कॉन्फिगरेशन के साथ बेहतर प्रदर्शन बनाए रखने में मदद कर सकती है। इंजन का वजन, आकार, ईंधन खपत, विश्वसनीयता, ताप प्रबंधन, रखरखाव और विमान के एयरफ्रेम के साथ उसका एकीकरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
सुपरक्रूज और स्टील्थ में कितनी मदद मिलेगी?
पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में सुपरक्रूज और स्टील्थ जैसी क्षमताएं महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। लेकिन इनके लिए केवल शक्तिशाली इंजन पर्याप्त नहीं है। सुपरक्रूज हासिल करने में विमान का एयरोडायनामिक डिजाइन, वजन, एयर इनटेक, ड्रैग और इंजन की वास्तविक ड्राई थ्रस्ट क्षमता सभी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसी तरह 2D फ्लैट नोज़ल स्टील्थ और इंफ्रारेड सिग्नेचर को प्रभावित कर सकता है, लेकिन केवल नोज़ल बदल देने से विमान की स्टील्थ क्षमता अचानक बहुत ज्यादा नहीं बढ़ जाती। इसके लिए पूरे एयरफ्रेम और इंजन इंस्टॉलेशन का डिजाइन महत्वपूर्ण होता है।
Su-30MKI के लिए भी हो सकता है विकल्प?
177S को लेकर एक और दिलचस्प संभावना Su-30MKI बेड़े से जुड़ी है। भारतीय वायुसेना के Su-30MKI विमानों में AL-31FP परिवार के इंजन इस्तेमाल होते हैं। यदि रूस नया हाई-थ्रस्ट इंजन भारतीय Su-30MKI के लिए अनुकूलित करने का प्रस्ताव देता है, तो इससे मौजूदा लड़ाकू विमानों की क्षमता और सेवा जीवन को बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है।
रूस के प्रस्ताव में सबसे बड़ा आकर्षण क्या है?
भारत के लिए रूस के प्रस्ताव का सबसे बड़ा आकर्षण केवल इंजन की शक्ति नहीं, बल्कि तकनीक हस्तांतरण और स्थानीय उत्पादन हो सकता है।
यदि किसी इंजन की महत्वपूर्ण तकनीक भारत में उपलब्ध होती है और उसका निर्माण देश में किया जा सके, तो इससे भारतीय एयरोस्पेस उद्योग को लंबे समय में फायदा मिल सकता है।
भारत लंबे समय से लड़ाकू विमान इंजन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की कोशिश कर रहा है। इसलिए किसी विदेशी इंजन के साथ व्यापक तकनीकी सहयोग भविष्य के स्वदेशी इंजन कार्यक्रमों के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
GE, Safran और Rolls-Royce से भी बातचीत
भारत AMCA के लिए विदेशी इंजन विकल्पों पर भी काम कर रहा है। अमेरिका की GE Aerospace , फ्रांस की Safran और ब्रिटेन की Rolls-Royce जैसी कंपनियां भारतीय लड़ाकू विमान इंजन कार्यक्रम के संदर्भ में महत्वपूर्ण रही हैं। भारत के सामने असली चुनौती यह है कि उसे सिर्फ एक शक्तिशाली इंजन नहीं चाहिए। उसे ऐसा समाधान चाहिए जिसमें तकनीक हस्तांतरण, स्थानीय निर्माण, विश्वसनीयता, लागत और दीर्घकालिक सपोर्ट सभी शामिल हों।
भारत के साथ क्या है दिक्कत
रूसी इंजन का विकल्प आकर्षक दिखाई दे सकता है, लेकिन इसके साथ कुछ सवाल भी जुड़े हैं। पहला सवाल विश्वसनीयता और मेंटेनेंस का है। भारतीय वायुसेना के रूसी मूल के विमानों और इंजनों के रखरखाव का लंबा अनुभव है, लेकिन नए इंजन की वास्तविक विश्वसनीयता उसके परिचालन में आने के बाद ही पूरी तरह सामने आएगी।
दूसरा मुद्दा डिलीवरी और उत्पादन क्षमता का है। यदि इंजन अभी विकास या परीक्षण के चरण में है, तो बड़े पैमाने पर उत्पादन तक पहुंचने में समय लग सकता है।
तीसरा सवाल तकनीक हस्तांतरण की वास्तविक सीमा का है। भारत के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि रूस वास्तव में कौन-सी तकनीक, डिजाइन जानकारी और निर्माण क्षमता साझा करने को तैयार है।
भारत के लिए क्या हो सकता है सबसे बेहतर रास्ता?
AMCA का इंजन भारत के लिए केवल एक खरीद का मामला नहीं है। यह अगले कई दशकों की भारतीय एयरोस्पेस क्षमता को प्रभावित कर सकता है। अगर 177S वास्तव में अपेक्षित प्रदर्शन, विश्वसनीयता और तकनीकी हस्तांतरण की शर्तें पूरी करता है, तो रूस का प्रस्ताव भारत के लिए आकर्षक हो सकता है। खासकर तब, जब स्थानीय उत्पादन और महत्वपूर्ण तकनीक भारत में उपलब्ध कराने की ठोस व्यवस्था हो।











