कोरबा

DMF Inquiry : कोरबा डीएमएफटी मामले की जांच शुरू…! तीन सदस्यीय जांच दल ने सुनी आपत्तियां…4000 करोड़ के खर्च पर उठे सवाल

500 गांवों में हुए डीएमएफ कार्यों का ब्यौरा मांगने पहुंचे याचिकाकर्ता

कोरबा, 15 जनवरी। DMF Inquiry : कोरबा जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) के कथित कुआवंटन और कुप्रबंधन को लेकर दायर शिकायतों की जांच के लिए राज्य शासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच दल ने सोमवार को जिला कार्यालय कोरबा में याचिकाकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की आपत्तियां सुनीं।

जांच समिति के समक्ष रखी गई आपत्तियां

याचिकाकर्ता लक्ष्मी चौहान, सपुरन कुलदीप और अजय श्रीवास्तव सहित अन्य लोगों ने कोरबा डीएमएफ प्रभारी एवं जांच समिति के सदस्य हरिशंकर चौहान, उपायुक्त (विकास) कार्यालय आयुक्त बिलासपुर संभाग, श्रीमती स्मृति तिवारी, उपायुक्त (राजस्व) कार्यालय आयुक्त बिलासपुर संभाग तथा श्रीमती स्मिता पाण्डेय, लेखाधिकारी कार्यालय आयुक्त बिलासपुर संभाग के समक्ष अपनी बातें रखीं।

10 साल में 4000 करोड़ खर्च, फिर भी सवाल

सुनवाई के दौरान सवाल उठाया गया कि बीते 10 वर्षों में डीएमएफ मद से करीब 4000 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन अधिकांश राशि ऐसे क्षेत्रों में व्यय की गई जो प्रत्यक्ष खनन प्रभावित नहीं हैं। बड़े-बड़े भवनों और निर्माण कार्यों में डीएमएफ की राशि खर्च होने के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि उससे होने वाली आय का कितना लाभ भूविस्थापितों और खनन प्रभावित क्षेत्रों को मिलेगा।

पर्यटन क्षेत्र में डीएमएफ खर्च पर आपत्ति

सतरेंगा जैसे पर्यटन क्षेत्र, जो पर्यटन मंडल के अधीन है, वहां भी डीएमएफ राशि से कार्य कराए जाने पर आपत्ति जताई गई। बताया गया कि यहां से होने वाली आय पर्यटन मंडल को जाती है, ऐसे में भूविस्थापितों को इसका क्या लाभ होगा, यह स्पष्ट नहीं है।

दोहरी फंडिंग की आशंका

कुछ मामलों में एसईसीएल के सीएसआर मद से कराए गए कार्यों को भी डीएमएफ से किया गया बताकर राशि खर्च किए जाने की आशंका जताई गई। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि जिन विभागों के पास अपने विभागीय बजट हैं, उनके कार्य भी डीएमएफ की राशि से कराए जा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कार्य अपेक्षित रूप से नजर नहीं आते।

500 गांवों में हुए कार्यों का ब्यौरा मांगा

आवेदक लक्ष्मी चौहान ने जांच समिति से मांग की कि राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका में जिन लगभग 500 प्रत्यक्ष गांवों में डीएमएफटी से कार्य कराए जाने का उल्लेख किया गया है, उससे संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने दस्तावेज मिलने के बाद पांच दिवस का समय अपना पक्ष रखने के लिए देने का भी अनुरोध किया।

जांच समिति के समक्ष रखी गई प्रमुख मांगें

सपुरन कुलदीप ने मांग रखी कि डीएमएफटी मद से की जा रही सभी नियुक्तियों में प्रत्यक्ष खनन प्रभावितों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज कल्याण विभागों में अब तक की गई एक वर्षीय संविदा नियुक्तियों को निरस्त कर नियमानुसार पुनः संविदा भर्ती प्रक्रिया अपनाने की मांग की। जांच दल ने सभी पक्षों की बातें सुनकर आवश्यक दस्तावेजों के परीक्षण के बाद आगे की कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

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