रायपुर

Fake Passport : महादेव ऐप के सौरभ चंद्राकर का नया खुलासा…! फर्जी पासपोर्ट पर बना ‘अजन्ता मेंडिस’…ओमान में गिरफ्तारी के बाद बड़ा राज

फर्जी पहचान और अलग जन्मतिथि की जांच


रायपुर, 20 जुलाई। Fake Passport : महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले के कथित प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की ओमान में गिरफ्तारी के बाद जांच में नया मोड़ सामने आया है। जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, उसके पास से एक कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट सामने आया है, जिसमें उसकी तस्वीर तो है, लेकिन नाम “Ajanta Mendis” दर्ज बताया जा रहा है। यह नाम श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस के नाम से मिलता-जुलता है। हालांकि, जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि पूर्व क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस का इस मामले से कोई संबंध नहीं है।

फर्जी पहचान और अलग जन्मतिथि की जांच

जांच एजेंसियों के मुताबिक, कथित इंडोनेशियाई पासपोर्ट में सौरभ चंद्राकर की जन्मतिथि 11 मार्च 1998 दर्ज है, जबकि पहले सामने आए वानूआतू की नागरिकता संबंधी दस्तावेजों में जन्मतिथि 13 जनवरी 1995 बताई गई थी। अब एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या अलग-अलग पहचान और जन्मतिथियों का इस्तेमाल कानूनी कार्रवाई और प्रत्यर्पण प्रक्रिया से बचने के उद्देश्य से किया गया।

ओमान में प्रवेश को लेकर जांच

अधिकारियों के अनुसार, जांच इस बात की भी हो रही है कि क्या सौरभ चंद्राकर ने इसी कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के आधार पर ओमान में प्रवेश किया था। यदि ऐसा साबित होता है, तो ओमान में उसके खिलाफ अलग कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

प्रत्यर्पण में हो सकती है देरी

जांच अधिकारियों का कहना है कि यदि फर्जी पासपोर्ट से जुड़े आरोपों की पुष्टि होती है, तो पहले ओमान में इस मामले की कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद ही भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध पर अंतिम निर्णय लिया जा सकेगा। भारत सरकार और जांच एजेंसियां भारत-ओमान प्रत्यर्पण संधि के तहत उसे वापस लाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी हैं।

2023 से एजेंसियों की तलाश में

सौरभ चंद्राकर वर्ष 2023 से भारतीय जांच एजेंसियों की तलाश में है। उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क के जरिए हजारों करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया गया।

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