रायपुर, 26 अगस्त। CGPSC Scam : छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती मामले में गिरफ्तार पूर्व अध्यक्ष और रिटायर्ड IAS अधिकारी टामन सिंह सोनवानी को लेकर स्वास्थ्य से जुड़ी खबरें सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया और कुछ स्थानीय दावों में उनकी तबीयत बिगड़ने तथा रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट में इलाज और पेसमेकर लगाए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में फिलहाल पेसमेकर इम्प्लांट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए उनके स्वास्थ्य को लेकर किसी भी दावे को आधिकारिक मेडिकल या जेल प्रशासन की पुष्टि के बिना अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
CGPSC मामले में जेल में हैं टामन सिंह सोनवानी
टामन सिंह सोनवानी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं। CGPSC की 2020-21 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर और चयन में अनियमितताओं को लेकर उनके खिलाफ जांच चल रही है। 25 जुलाई 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें कथित पेपर लीक और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया।
CBI जांच के बाद ED की एंट्री
यह मामला पहले से CBI की जांच के दायरे में है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जनवरी 2026 के आदेश में मामले में सोनवानी समेत कई आरोपियों का उल्लेख है और अदालत ने उनकी दूसरी जमानत याचिका खारिज की थी। आदेश में जांच एजेंसी की ओर से भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और परिवार के सदस्यों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों का उल्लेख है। अब ED कथित अवैध लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल की जांच कर रही है। एजेंसी के मुताबिक, जांच में कथित तौर पर CSR के माध्यम से पैसों के लेन-देन का एंगल भी सामने आया है।
पेसमेकर लगाए जाने की खबर कितनी सही?
टामन सिंह सोनवानी की तबीयत बिगड़ने और ब्रैडीकार्डिया के बाद पेसमेकर लगाए जाने का दावा किया जा रहा है। लेकिन इस समय उपलब्ध प्रमुख विश्वसनीय रिपोर्टों में इस मेडिकल प्रक्रिया की स्पष्ट पुष्टि नहीं मिलती। ऐसे में “पेसमेकर लगा दिया गया” को पुष्ट खबर की तरह प्रकाशित करने के बजाय, आधिकारिक अस्पताल, जेल प्रशासन या चिकित्सकीय बयान मिलने तक इसे अपुष्ट दावा के रूप में रखना बेहतर है।
CGPSC Scam में क्या हैं आरोप?
CBI और ED की जांच के अनुसार, 2020-21 की CGPSC राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक और चयन प्रक्रिया में हेरफेर किया गया। जांच में प्रभावशाली लोगों और रिश्तेदारों को सरकारी पदों पर चयन का कथित लाभ पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी मामले में सोनवानी सहित सात आरोपियों का उल्लेख है। अदालत ने जनवरी 2026 में उनकी दूसरी जमानत याचिका खारिज करते हुए मामले की गंभीरता और जांच जारी होने को ध्यान में रखा था।












