बस्ती, 07 सितम्बर। Basti Honey Trap Case : उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में वाल्टरगंज थाने के प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह की आत्महत्या के बाद कथित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में 32 वर्षीय प्रियंका चौधरी, उसके पिता राम नयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि प्रियंका लोगों से नजदीकी बढ़ाकर उनकी निजी तस्वीरें और वीडियो हासिल करती थी, जिसके बाद कथित तौर पर पिता और वकील के साथ मिलकर ब्लैकमेलिंग की जाती थी।
SO सूर्य प्रकाश सिंह की मौत से शुरू हुई जांच
29 अगस्त को वाल्टरगंज थाने के प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह अपने सरकारी आवास पर मृत पाए गए थे। पुलिस के मुताबिक उन्होंने फांसी लगाकर आत्महत्या की। घटना के बाद उनके बेटे संदीप सिंह ने 5 सितंबर को बस्ती कोतवाली में FIR दर्ज कराई। शिकायत के बाद पुलिस ने मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच शुरू की। इसी जांच में पुलिस की नजर प्रियंका चौधरी और उसके संपर्क में रहे लोगों पर गई।
दोस्ती से नजदीकी और फिर कथित ब्लैकमेलिंग
पुलिस के मुताबिक, प्रियंका चौधरी कथित तौर पर पहले लोगों से संपर्क बनाती थी। बातचीत और दोस्ती के बाद नजदीकियां बढ़ाई जाती थीं और इसी दौरान निजी बातचीत, तस्वीरें या वीडियो रिकॉर्ड किए जाने का आरोप है। पुलिस का दावा है कि बाद में इन्हीं निजी सामग्री को सार्वजनिक करने या परिवार और समाज में बदनाम करने की धमकी देकर पैसे की मांग की जाती थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर कितने लोगों को इस नेटवर्क का निशाना बनाया गया।
पिता और वकील की भूमिका भी जांच के घेरे में
पुलिस का दावा है कि प्रियंका इस कथित नेटवर्क में अकेली नहीं थी। उसके पिता राम नयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव की भूमिका भी जांच में सामने आई है। आरोप है कि प्रियंका द्वारा संपर्क और नजदीकी बनाए जाने के बाद कथित ब्लैकमेलिंग और पैसों की वसूली में दोनों की भूमिका रहती थी। DIG संजीव त्यागी के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण में सूर्य प्रकाश सिंह का प्रियंका और विजय प्रकाश यादव से संपर्क सामने आया है।
आखिरी कॉल बनी जांच की अहम कड़ी
पुलिस के अनुसार 29 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 41 मिनट पर अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव ने सूर्य प्रकाश सिंह को आखिरी कॉल की थी। इस कॉल को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उस बातचीत में क्या हुआ और क्या उसका संबंध SO की मौत से पहले की परिस्थितियों से था। तीनों आरोपियों को हॉस्पिटल चौराहे से गिरफ्तार किया गया है। अब पुलिस कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियों, संभावित पीड़ितों और इसमें शामिल दूसरे लोगों का पता लगाने में जुटी है। हालांकि, आरोपियों पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।












