Champa Police Station : पुलिस हिरासत में युवक की मौत के बाद नया विवाद, स्टाम्प पेपर पर हर महीने 25 हजार देने का दावा, अब पुलिस मुख्यालय तक पहुंची बात

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जांजगीर-चांपा, 12 सितंबर। Champa Police Station : जांजगीर-चांपा में पुलिस हिरासत में शिव सहिस उर्फ गुल्लू की मौत का मामला अभी पूरी तरह थमा भी नहीं है कि अब स्टाम्प पेपर पर किए गए एक कथित लिखित वादे ने विवाद को नया मोड़ दे दिया है। सामने आए दस्तावेज के मुताबिक, मृतक के बच्चों की शिक्षा और भरण-पोषण के लिए हर महीने 25 हजार रुपये देने का इकरार किया गया है। इस कथित आश्वासन को लेकर पुलिस विभाग के भीतर भी सवाल उठने की चर्चा है।

हिरासत में बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान मौत

मामला चांपा थाना क्षेत्र के मेहंदीपारा का है। पुलिस ने शिव सहिस उर्फ गुल्लू को महुआ शराब से जुड़े आबकारी मामले में हिरासत में लिया था। पुलिस के अनुसार, शिव की हिरासत के दौरान तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उसे बीडीएम अस्पताल चांपा ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे जांजगीर जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

मौत के बाद भड़का आक्रोश, थाने के बाहर बैठी पत्नी

शिव की मौत की खबर सामने आते ही परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया और चांपा थाने के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। मृतक की पत्नी बच्चों के साथ धरने पर बैठ गई। परिजनों ने 50 लाख रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और बच्चों की पढ़ाई व भरण-पोषण की जिम्मेदारी लेने की मांग रखी। साथ ही जिम्मेदार बताए जा रहे पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी की मांग भी की गई।

कार्रवाई के बाद सामने आया 25 हजार रुपये का लिखित इकरार

विरोध के बीच एसपी विजय कुमार पाण्डेय के निर्देश पर पहले एक आरक्षक को निलंबित किया गया और बाद में चांपा थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया। इसी बीच अब स्टाम्प पेपर पर किए गए कथित लिखित इकरार की जानकारी सामने आई है।

दस्तावेज में चांपा थाना प्रभारी के हस्ताक्षर के साथ यह उल्लेख होने की बात कही जा रही है कि चांपा थाना प्रभारी के पद पर जो भी अधिकारी तैनात रहेगा, उसके माध्यम से मृतक शिव सहिस के बच्चों की शिक्षा और पोषण के लिए हर महीने 25 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसमें बच्चों को आगे भी सहायता जारी रखने की बात दर्ज होने का दावा किया गया है।

पुलिस मुख्यालय तक पहुंचा मामला, उठे अधिकार और प्रक्रिया पर सवाल

स्टाम्प पेपर पर लंबे समय तक आर्थिक सहायता देने का यह कथित वादा अब पुलिस विभाग के लिए बड़ा सवाल बन गया है। चर्चा है कि वरिष्ठ अधिकारी इस तरह के इकरार को लेकर नाराज हैं। हालांकि पुलिस मुख्यालय की ओर से इस संबंध में फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

अब पूरे मामले में दो अहम सवाल खड़े हो गए हैं। पहला, पुलिस हिरासत में शिव सहिस की मौत की वास्तविक वजह क्या थी? दूसरा, परिवार को हर महीने 25 हजार रुपये देने का लिखित आश्वासन किस अधिकार और किस आधिकारिक प्रक्रिया के तहत किया गया? इन दोनों सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि जांजगीर-चांपा का यह मामला आगे किस दिशा में बढ़ता है।

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