Korba Police: दर्री CSP गिरिजा शंकर साव की विवेचना से जुड़े 11 साल पुराने नक्सली सपोर्ट नेटवर्क केस में 5 आरोपी दोषसिद्ध, NIA कोर्ट का बड़ा फैसला।
कांकेर/ कोरबा।Korba Police: वर्ष 2015 में पुलिस पार्टी पर हुए नक्सली हमले और नक्सलियों को रसद, परिवहन व अन्य मदद पहुंचाने वाले सपोर्ट नेटवर्क से जुड़े मामले में कांकेर की विशेष एनआईए अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। इस मामले की विवेचना में अहम भूमिका निभाने वाले तत्कालीन पुलिस अधिकारी और वर्तमान में दर्री CSP गिरिजा शंकर साव की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अदालत ने पांच आरोपियों को विभिन्न धाराओं में दोषसिद्ध ठहराया है।
विशेष न्यायाधीश श्रीमती विभा पाण्डेय की अदालत ने प्रभाकर उर्फ बालमुरी नारायण राव, राजे कांगे उर्फ मालती उर्फ निर्मला, चिन्तु राम ताम्रकार, रमेश कुमार कुमेटी और श्यामनाथ उसेण्डी को दोषी माना है।
नागरमारी पहाड़ी पर पुलिस पार्टी पर बरसी थीं गोलियां
मामला 7 सितंबर 2015 का है। थाना कोरर क्षेत्र के ग्राम भैंसगांव स्थित नागरमारी पहाड़ी पर गश्त कर रही पुलिस पार्टी पर वर्दीधारी नक्सलियों ने अचानक फायरिंग कर दी थी। पुलिस के मुताबिक हमले का उद्देश्य जवानों की हत्या कर उनके हथियार लूटना था।
घटना के बाद थाना कोरर में अपराध क्रमांक 108/2015 दर्ज कर जांच शुरू की गई। विवेचना के दौरान पुलिस ने केवल हमले में शामिल लोगों तक सीमित रहने के बजाय नक्सलियों को मदद पहुंचाने वाले नेटवर्क की कड़ियां भी खंगालीं।
विवेचना में खुलता गया नक्सलियों का सपोर्ट सिस्टम
जांच के दौरान नक्सलियों तक नकदी, नक्सली साहित्य, राशन-रसद और परिवहन सुविधा पहुंचाने वाले नेटवर्क की जानकारी सामने आई। पुलिस कार्रवाई में आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग सामग्री बरामद होने का उल्लेख अभियोजन पक्ष की ओर से किया गया।
राजे कांगे और श्यामनाथ उसेण्डी के कब्जे से ₹1.72 लाख से अधिक नकदी, नक्सली बैनर, पत्रिकाएं, पत्राचार और डिजिटल सामग्री बरामद होने की बात सामने आई।
वहीं प्रभाकर उर्फ बालमुरी नारायण राव के कब्जे से दो कथित फर्जी वोटर आईडी मिलने का उल्लेख मामले में किया गया।
चिन्तु राम ताम्रकार पर बोलेरो वाहन के जरिए नक्सलियों को सहयोग पहुंचाने तथा रमेश कुमार कुमेटी पर मोटरसाइकिल के माध्यम से राशन, रसद और आवाजाही में मदद करने का मामला सामने आया।
CSP गिरिजा शंकर साव की विवेचना में नेटवर्क की कड़ियां जुड़ीं
इस पुराने नक्सली प्रकरण की विवेचना में गिरिजा शंकर साव की भूमिका महत्वपूर्ण रही। जांच के दौरान नक्सली हमले के पीछे मौजूद सपोर्ट सिस्टम की कड़ियों को जोड़ते हुए आरोपियों तक पहुंच बनाई गई और उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए गए।
करीब 11 साल बाद अदालत के फैसले में पांच आरोपियों का दोषसिद्ध होना उस समय की विवेचना की दिशा और पुलिस की कार्रवाई को एक बार फिर चर्चा में ले आया है।
इन 5 आरोपियों को ठहराया गया दोषी
अदालत ने IPC की धारा 147, 148, 307/149, 212, आयुध अधिनियम की धारा 25, 27 तथा UAPA की धारा 19, 38(2), 39(2) के तहत पांचों आरोपियों को दोषसिद्ध किया है।
दोषसिद्ध आरोपी:
1. प्रभाकर उर्फ बालमुरी नारायण राव
2. राजे कांगे उर्फ मालती उर्फ निर्मला
3. चिन्तु राम ताम्रकार
4. रमेश कुमार कुमेटी
5. श्यामनाथ उसेण्डी
एक आरोपी पर पहले ही फैसला, चार अब भी फरार
प्रकरण के सह-आरोपी श्रवण उर्फ जुनऊ कोर्राम के संबंध में अदालत पूर्व में 1 जून 2024 को फैसला सुना चुकी है। वहीं रैनू दुग्गा, सोनू, मनोज और पीलाराम मण्डावी फरार बताए गए हैं, जिनकी तलाश जारी है।
नक्सलियों के हथियारबंद हमले से शुरू हुई जांच जब उनके पीछे काम कर रहे रसद और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तक पहुंची, तो मामले की तस्वीर ही बदल गई। अब पांच आरोपियों की दोषसिद्धि के बाद तत्कालीन विवेचना और उसमें जुटाए गए साक्ष्यों की भूमिका भी चर्चा में है।











