Korba Crime Scrap Vehicles Seized: एक कॉल, छह गाड़ियां और सवालों की लंबी कतार! कबाड़ लोड वाहनों पर कार्रवाई के बाद शहर में शुरू हुई चर्चाओं की ‘स्क्रैप स्टोरी’
कोरबा।Korba Crime Scrap Vehicles Seized: कबाड़ का कारोबार इन दिनों कोरबा में एक अलग ही कहानी लिखता नजर आ रहा है। कहानी में एक तरफ पुलिस कंट्रोल रूम है, दूसरी तरफ कबाड़ लोड गाड़ियां और बीच में खड़ा है शहर का सबसे मासूम सवाल- “अगर कबाड़ चल ही नहीं रहा था, तो ये गाड़ियां चलकर पहुंचीं कैसे मेरे भाई?”
बताया जा रहा है कि पुलिस कंट्रोल रूम में एक शिकायत अथवा सूचना पहुंची और उसके बाद कार्रवाई का पहिया ऐसा घूमा कि एक के बाद एक कबाड़ लोड छह गाड़ियां पुलिस के हत्थे चढ़ गईं। कार्रवाई की खबर फैलते ही कबाड़ के कारोबार को लेकर चर्चाओं का बाजार भी गर्म हो गया।
अब जनमानस का अपना गणित है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि कबाड़ का कारोबार अगर ठप है, तो कबाड़ से लदी गाड़ियां आखिर सड़क पर किस भरोसे दौड़ रही हैं? और अगर गाड़ियां सड़क पर थीं, तो फिर उन्हें देखने के लिए कंट्रोल रूम तक फोन क्यों पहुंचा?
एक फोन कॉल का ‘कमाल’ या पुलिस की मुस्तैदी?
मामले में सबसे ज्यादा चर्चा कंट्रोल रूम में मिले इनपुट को लेकर है। कहा जा रहा है कि सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई और कार्रवाई में छह वाहन पकड़ में आ गए।
यही वजह है कि शहर में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कोई इसे पुलिस की मुस्तैदी बता रहा है तो कोई सवाल कर रहा है कि क्या कबाड़ की गाड़ियों को पकड़ने के लिए अब कंट्रोल रूम में फोन ही सबसे तेज रास्ता बन गया है?
राजेश साहू और रवि साहू से जुड़ी होने की चर्चा
जब्त वाहनों को लेकर यह भी चर्चा है कि इनमें कुछ गाड़ियां राजेश साहू और रवि साहू से जुड़ी बताई जा रही हैं। हालांकि वाहनों के वास्तविक स्वामित्व, कबाड़ की वैधता और पूरे मामले में संबंधित लोगों की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब असली सवाल कबाड़ से बड़ा है!
छह गाड़ियां पकड़ी गईं, कार्रवाई हुई और मामला जांच के पाले में चला गया। लेकिन जनता के सवाल अभी वहीं खड़े हैं।
कबाड़ नहीं चल रहा तो छह गाड़ियां कबाड़ लेकर कैसे चल रही थीं?
और अगर चल रही थीं, तो क्या एक फोन कॉल ही वह ‘गूगल मैप’ है, जो पुलिस को कबाड़ की मंजिल तक पहुंचा देता है?
फिलहाल पुलिस कार्रवाई जारी है। आगे जांच में यह साफ होगा कि इन गाड़ियों में कबाड़ कहां से आया, कहां जा रहा था और पूरा मामला आखिर कितना बड़ा है। तब तक कोरबा की जनता का व्यंग्य जारी है-
“कबाड़ चले न चले, खबर जरूर दौड़ रही है मेरे भाई!”












